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गोविंद गार्डन में साइकिल चोरी, सीसीटीवी में कैद चोर की करतूत!

भोपाल के थाना ऐशबाग क्षेत्र से एक साइकिल चोरी की घटना सामने आई है। यह वारदात गोविंद गार्डन इलाके की है, जहां एक अज्ञात युवक ने खुलेआम साइकिल चुराई और मौके से फरार हो गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।यह तस्‍वीरें ऐशबाग थाना क्षेत्र की हैं, जहां गोविंद गार्डन में खड़ी एक साइकिल को चोर ने मात्र कुछ सेकंड में चुरा लिया।

सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा है कि चोर बड़ी ही चालाकी से पहले इलाके का मुआयना करता है, फिर मौका देखकर साइकिल लेकर फरार हो जाता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह कोई पहली घटना नहीं है, इस क्षेत्र में पहले भी चोरी की वारदातें हो चुकी हैं।

हज 2025 सफलतापूर्वक संपन्न, मध्य प्रदेश के हाजियों की वापसी शुरू।

भोपाल-हज 2025 के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब मध्य प्रदेश से हज यात्रा पर गए हाजियों की वापसी का क्रम प्रारंभ हो चुका है। इस संबंध में मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष रफत वारसी ने मीडिया से चर्चा करते हुए जानकारी दी कि प्रदेश के हज यात्रियों की अंतिम हज उड़ान 11 जुलाई को मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हज यात्रा के लिए मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में आवेदकों को चयनित कर सऊदी अरब भेजा गया, जो कि राज्य हज कमेटी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हज जैसे पवित्र धार्मिक कर्तव्य को निभाने का अवसर प्राप्त हुआ। रफत वारसी ने आगे बताया कि हज यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी द्वारा विशेष तैयारी की गई थी। इसके तहत राज्य के विभिन्न विभागों से 46 कर्मचारियों को चयनित कर उन्हें सऊदी अरब भेजा गया। इन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर राज्य हज निरीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ये निरीक्षक पूरे हज कालखंड में सऊदी अरब में मौजूद रहे और मध्य प्रदेश से गए सभी हज यात्रियों को मार्गदर्शन, सहायता और आवश्यकतानुसार सहयोग प्रदान करते रहे। हज के दौरान चिकित्सा, रहने की व्यवस्था, आवागमन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने में इन निरीक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। राज्य हज कमेटी की इस व्यवस्था की हाजियों ने भी सराहना की है और कमेटी का धन्यवाद व्यक्त किया है। रफत वारसी ने अंत में कहा कि हज जैसे विशाल आयोजन में समर्पित टीम व प्रशासनिक योजना की वजह से यह कार्य कुशलता से संपन्न हो पाया, और हम उम्मीद करते हैं कि आगामी वर्षों में यह व्यवस्था और अधिक सशक्त और प्रभावी होगी।

भोपाल के अशोका गार्डन में फिर सक्रिय हुआ जुए का अड्डा, पुलिस की अनदेखी पर उठे सवाल

भोपाल। राजधानी के अशोका गार्डन थाना क्षेत्र के रूप नगर में वर्षों से बंद पड़ा जुए का अड्डा एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इस अवैध गतिविधि का खुलासा तब हुआ जब रूपनगर में ही रहने वाले युवक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया युवक के इस वीडियो ने सनसनी मचा दी। वायरल वीडियो में युवक ने आरोप लगाया है कि रूपनगर रूपनगर में ही रहने वाले माइकल नामक व्यक्ति खुलेआम जुए का संचालन कर रहा है, जिसमें शहर के कई नामी जुआरी शामिल होते हैं और लाखों रुपये के दांव लगाए जा रहे हैं। और जवान ओके रोज-रोज यहां आने से रूपनगर मैं रहने वाली महिलाएं तो प्रताड़ित हो ही रही हैं साथ ही उन बच्चों का भविष्य भी खतरे में नजर आ रहा है जो शिक्षा को छोड़ 52 पत्तों की किताब मैं अपना भविष्य ढूंढने लगे हैं रूपनगर पहले भी सत्ता और जुआ के खेल में माहिर क्षेत्र में से एक हुआ करता था लेकिन कई समय से यहां पर यह अवैध कारोबार नहीं चल रहा था फिर अचानक इस क्षेत्र के पुराने बदमाश के सहयोग से इस अवैध कारोबार का संचालन होने लगा है

शकील ने एकल सत्य समाचार से चर्चा के दौरान बताया कि जुए में जीतने वाले लोगों की “नाल तक काटी जा रही है”, इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जब शकील ने अशोका गार्डन पुलिस को इसकी सूचना दी, तो जवाब मिला – “खुले में चल रहा है तो कार्रवाई नहीं करेंगे, अगर किसी घर में हो तो बताओ।”

यह पुलिस का जवाब कई सवाल खड़े करता है। क्या कानून सिर्फ घरों में चल रहे जुए पर लागू होता है और खुले में चल रहे जुए को छूट मिली हुई है? क्या पुलिस की यह अनदेखी कहीं मिलीभगत की तरफ इशारा तो नहीं कर रही? यदि शकील के लगाए गए आरोपों में सच्चाई है, तो यह गंभीर मामला अशोका गार्डन थाने की भूमिका को संदेह के घेरे में ला खड़ा करता है।

फिलहाल यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है, और स्थानीय लोगों के बीच भी पुलिस की निष्क्रियता को लेकर चर्चा होने लगी है अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है – निष्पक्ष जांच करता है या आरोपों को नज़रअंदाज़ कर मामले को दबाने की कोशिश?

थाना मंगलवार क्षेत्र की हकीकत – नाइट ड्यूटी में ‘दारू-बिरयानी सेवा’ चालू है!

राजधानी भोपाल में दवाइयां लोगों को रात के अंधेरे में मिले नहीं मिले इसकी कोई गारंटी नहीं है लेकिन नशे का सामान आपको 24 घंटे उपलब्ध हो सकता है इसकी जरूर गारंटी दी जा सकती है लगातार सूचना मिलने पर एकल सत्य समाचार की टीम ने अपने केमरे में रात के अंधेरे में चल रहे नशे के कारोबार को कैद किया है थाना मंगलवार क्षेत्र में रात के एक-दो बज रहे हों, माहौल नींद का हो या सन्नाटे का, लेकिन यहां का नज़ारा कुछ और ही कहानी सुना रहा है।

वाइन शॉप्स तो नियमों के मुताबिक बंद हो जाती हैं, लेकिन असली खेल तो पर्दे के पीछे चलता है। थोड़ी सी चालाकी, और कुछ ‘जानकारी’ हो तो आपको दारू 24 घंटे मिल जाएगी – खुलेआम नहीं, पर्दों के पीछे, लेकिन सबको पता है कहां से लेनी है।

और बात सिर्फ दारू तक सीमित नहीं है, ‘जम जम होटल’ जैसे कुछ खास ठिकानों से रात के किसी भी पहर बिरयानी हाज़िर हो जाती है – मानो खाने का नहीं, सिस्टम का मुंह चिढ़ा रहे हों।

अब सवाल ये उठता है –
नाइट ड्यूटी में पुलिस क्या कर रही है?
क्या उन्हें ये सब दिखता नहीं या दिखकर भी कुछ नहीं होता?
कब लगेगी लगाम इस खुले खेल पर?
क्या थाना मंगलवार क्षेत्र में नियमों की रात को छुट्टी है?

अब देखना ये है कि पुलिस इस गुपचुप धंधे पर शिकंजा कसती है या फिर पर्दों के पीछे चलता रहेगा “24×7 सेवा” का ये काला कारोबार।

भोपाल पुलिस में तबादला नीति का हाल बेहाल: अफसरों की मनमानी, अंगदों का कब्ज़ा, DGP के आदेश हवा में !

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुखिया और डीजीपी द्वारा पुलिसकर्मियों के नियमित तबादले को लेकर जारी निर्देशों को राजधानी के अफसर और बाबू ठेंगा दिखा रहे हैं। हाल ही में नगरीय सीमा में तीन दिन पहले हुए थोकबंद तबादलों में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। क्राइम ब्रांच और थानों में पदस्थ ऐसे पुलिसकर्मियों को बचा लिया गया है जो वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। डीजीपी के सख्त आदेश के बावजूद राजधानी के थानों और शाखाओं में “अंगदों” को हटाने के बजाय बाकी कर्मचारियों को तबादले की सूची में डाल दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, इन तबादलों में जानबूझकर गड़बड़ी की गई। PHQ के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी पुलिसकर्मी की एक जगह पर अधिकतम पोस्टिंग 3 साल की होनी चाहिए, लेकिन राजधानी के कई थानों में 8 से 15 साल से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारी खुलेआम तबादला नीति की धज्जियां उड़ा रहे हैं। थाना बजरिया में मनोज शिवड़े 15 साल, छन्नूलाल चौहान 9 साल और दीपक कटियार 8 साल से पदस्थ हैं। थाना बागसेवनिया में राकेश भारद्वाज और मुकेश स्थापक क्रमश: 8 और 9 साल से वहीं हैं, जबकि उपेन्द्र सिंह तीसरी पोस्टिंग में हैं। थाना मिसरोद में शैलेन्द्र भदौरिया करीब 15 साल से जमे हुए हैं।

थाना हबीबगंज में धीरेन्द्र सिंह और सुदर्शन मिश्रा 12-12 साल से पदस्थ हैं और AJK-हबीबगंज के बीच ऊपर-नीचे होते रहते हैं। थाना टीटी नगर में मनोज सिंह का तो पूरा सेवाकाल इसी थाने में बीतता दिखता है। चुनाभट्टी थाने में एक ASI 12 साल से तैनात हैं और कार्यवाहक प्रधान आरक्षक राजेश सेन थाने से लेकर ACP कार्यालय तक सीधा संबंध रखते हैं, इन्हें भी नहीं बदला गया। एमपी नगर थाने से सुनील और जितेन्द्र दीवार फांद कर क्राइम ब्रांच चले गए और फिर एमपी नगर लौट आए।

थाना कोलार में मनोज शर्मा सिपाही से ASI तक बन चुके हैं लेकिन तैनाती एक ही स्थान पर रही, वहीं हवलदार राजकुमार राजपूत दूसरी पोस्टिंग के बावजूद नहीं बदले गए। शाहपुरा थाना में नागेन्द्र सिंह की यह तीसरी पोस्टिंग है। थाना पिपलानी में केपी सिंह, मिनेश मिश्रा और विजय चौधरी आठ साल से अधिक समय से और दो-दो, तीन-तीन पोस्टिंग झेल चुके हैं।

अशोका गार्डन थाने की हालत सबसे अलग है, जहां ASI जयबीर सैगर पर दो महीने पहले हमला हुआ था लेकिन उन्हें फिर वहीं भेज दिया गया। ASI इरफान खान पहले 5 साल और अब 4 साल से वहीं तैनात हैं यानी 9 साल की पोस्टिंग। ASI हरवीर भी लगातार 5 साल से अशोका गार्डन में ही हैं।

MP नगर थाना में SI जितेन्द्र मिश्रा करीब 10 साल से पदस्थ हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या कुछ पुलिसकर्मियों को तबादला नीति से छूट मिली हुई है? ,आलोक तिवारी, छत्रपाल सिंह और अविनाश राय जैसे नाम ऐसे हैं जिन पर गंभीर आरोप लगे, फिर भी इन्हें मनमाफिक थानों में पोस्टिंग मिलती रही है।

प्रधान आरक्षक आलोक तिवारी पर महिला से पैसे लेने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें लाइन भेजा गया, लेकिन दो दिन में ही फिर से अरेरा हिल्स, और फिर कोहेफिजा थाने में पोस्टिंग मिल गई। बताया जाता है कि कोहेफिजा थाने में तैनात अधिकारी उनके रिश्तेदार हैं। छत्रपाल सिंह को कमला नगर और टीटी नगर के अलावा कहीं नौकरी करते नहीं देखा गया क्योंकि उनके करीबी नेताओं और मंत्रियों से अच्छे संबंध हैं।

अविनाश राय, जो कि शराब के नशे में अफसरों पर टिप्पणी करने के मामले में विवादों में रहे, आज भी सुरक्षित हैं।

क्राइम ब्रांच में फेरबदल की आशा लगाए पुलिसकर्मियों को तब झटका लगा जब उनके अधिकारियों ने चहेतों को बचा लिया। दरअसल, निशातपुरा क्षेत्र में एक पिस्तौलधारी को पकड़ने के बाद जबरन वसूली का मामला सामने आया था। इसमें कार्रवाई के तौर पर ASI जुबैर खान और एक आरक्षक को लाइन हाजिर किया गया, जबकि इस पूरे मामले के पीछे जो चेहरे थे, वो आज भी क्राइम ब्रांच में जमे हुए हैं।

क्राइम ब्रांच से साइबर और फिर से क्राइम ब्रांच में लाने की अदला-बदली दिखाती है कि किस तरह डीजीपी के आदेश का सिर्फ दिखावा किया गया। देर रात रवानगी के आदेश के बाद जोड़तोड़ कर कुछ को रुकवा दिया गया और कुछ को वापसी का आश्वासन दिया गया।

सूत्र बताते हैं कि राजधानी भोपाल में थानों का रिकार्ड उठाया जाए तो हर थाने में दो-चार ऐसे अंगद जरूर मिलेंगे जो 8 से 12 साल से वहीं जमे हुए हैं, जिनकी दूसरी-तीसरी पोस्टिंग है, जिनपर गंभीर आरोप हैं, फिर भी अधिकारी इन्हें बचा रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या राजधानी में डीजीपी के आदेश की कोई कीमत बची है? क्या जोन डीसीपी और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के सामने डीजीपी भी छोटे पड़ गए हैं? क्या तबादला नीति सिर्फ कमजोर पुलिसकर्मियों पर लागू होती है?

जरूरत है पारदर्शी और निष्पक्ष समीक्षा की। क्योंकि इससे न केवल पुलिसकर्मियों का मनोबल तय होगा, बल्कि जनता का सिस्टम पर भरोसा भी कायम रह पाएगा।

भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए केंद्र सरकार RTI एक्ट को सरकार कर रही है कमजोर कमजोर कर रही है: पुणीत टंडन

इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस के सूचना अधिकार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री पुनीत टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार सूचना के अधिकार (RTI) कानून को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, ताकि योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार को छिपाया जा सके। टंडन शनिवार को इंदौर दौरे पर थे, जहां गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सूचना अधिकार प्रकोष्ठ के शहर अध्यक्ष गिरीश जोशी और जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र डाकसे द्वारा उनका स्वागत किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए टंडन ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने RTI कानून लागू कर जनता को सरकार से सीधे सवाल पूछने का अधिकार दिया था। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया यह कदम कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने वाला भले रहा हो, लेकिन इससे लोकतंत्र को मजबूती मिली। वहीं वर्तमान केंद्र सरकार इस कानून को लगातार कमजोर कर रही है, ताकि सरकार की योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार पर परदा डाला जा सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में सूचना अधिकार प्रकोष्ठ के सभी पदाधिकारियों को RTI के माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहिए। टंडन ने यह भी कहा कि कई सरकारी विभाग RTI की जानकारी देने में जानबूझकर टालमटोल कर रहे हैं और आवेदकों को परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में भाजपा सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार की परतें RTI के माध्यम से खोली जाएंगी।

इस अवसर पर शहर कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव, सेवादल के कार्यवाहक अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल, कांग्रेस सेवादल के मीडिया प्रभारी मुकेश ठाकुर, प्रदेश सचिव प्रहलाद महवार, चुनाव प्रबंधन टीम से मीनाक्षी जयसवाल, काले खान, पुनीत शर्मा और राकेश निर्मल सहित अन्य कांग्रेस नेता उपस्थित रहे।

भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम दुरुपयोग, खाद्य विभाग बेखबर

राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग लगातार जारी है, हाल ही में मैरिज गार्डन के अंदर लगातार कई सिलेंडर फटने की घटना के बाद भी खाद विभाग ठीक से जाग नहीं पाया जिसका आलम यह है कि भोपाल के अधिकतर चौक चौराहे पर घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग कभी भी बड़ी दुर्घटना को दावत दे सकते हैं अगर खाद विभाग द्वारा जल्द घरेलू गैस के दुरुपयोग पर नकल नहीं कई गई तो आम जनता के लिए बड़ी दुर्घटना का कारण घरेलू गैस का दुरुपयोग बन सकता है लेकिन खाद्य विभाग की टीम इस गंभीर मामले को नजरअंदाज करती नजर आ रही है। शहर के हर चौक-चौराहे पर स्थित चाय और नाश्ते की दुकानों में धड़ल्ले से घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारियों की ओर से किसी भी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। ताजा मामला पंकज श्रीवास्तव और साधना नामक व्यक्तियों की दुकान का है, जहां कढ़ाई में तेल गर्म किया जा रहा है और नीचे घरेलू गैस सिलेंडर साफ देखा जा सकता है। यह पूरी स्थिति खाद्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आमजन की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है। खाद विभाग की टीम समय-समय पर करवाई करने का हवाला तो देती है लेकिन सच्चाई यह है कि खाद विभाग खुद ही इस लापरवाही को बढ़ावा दे रही है ऐसा प्रतीत होता है कलेक्टर कार्यालय के आसपास ही अगर आप देख तो कई चाय की होटल एवं रेस्टोरेंट में घरेलू सिलेंडर रोड पर ही जलते हुए मिल जाएंगे जब आम जनता इस घरेलू सिलेंडर के दुरुपयोग पर आवाज उठा सकती है तो खाद विभाग की टीम क्यों लापरवाही दिख रही है

GRP पुलिस ने सांसी गैंग के कुख्यात लीडर संदीप को किया गिरफ्तार।

Bhopal– मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रेलवे पुलिस को कुख्यात गैंग के लीडर को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।जीआरपी थाना प्रभारी जहीर खान के कुशल नेतृत्व में गठित टीम ने हरियाणा के कुख्यात सांसी गैंग के वारंटी संदीप पिता दलवीर सिंह (उम्र 30 वर्ष), निवासी ग्राम खेड़ी, थाना हांसी, जिला हिसार (हरियाणा) को 10 साल पुराने मामलों में रोहतक, हरियाणा से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। संदीप के खिलाफ कुल 12 वारंट लंबित थे, जिनमें 11 स्थायी वारंट और 1 गिरफ्तारी वारंट शामिल हैं। वह हरियाणा की सांसी गैंग का लीडर है, जिसकी तलाश जीआरपी भोपाल पुलिस को लंबे समय से थी।

संदीप 7 सदस्यीय गिरोह का सरगना है और जीआरपी भोपाल का गैंग हिस्ट्रीशीटर भी है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर ट्रेनों में चोरी सहित दर्जनों गंभीर आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया है। विभिन्न मामलों में उस पर कुल ₹35,000 का इनाम घोषित था। जीआरपी टीम ने समयावधि के भीतर वारंटी संदीप को माननीय न्यायालय, भोपाल में पेश किया। यह गिरफ्तारी जीआरपी भोपाल के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

बेरसिया में इनोवा कर से शराब तस्करी, पुलिस ने रास्ते में कसा शिकंजा

कय्यूम पठान की खास रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में शराब तस्करी का कारोबार दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है अवैध शराब का कारोबार करने वाले फिल्म देख कर नए-नए तरीके से शराब के कारोबार को करते रहते हैं लेकिन पुलिस भी इसे दो कदम आगे ही रहती ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें शराब तस्करी के लिए लग्जरी कर का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन पुलिस ने शराब तस्कर ऑन को गिरफ्तार सारी योजना फेल कर दी है बैरसिया के विदिशा रोड पर देर रात एक सफेद इनोवा तेज़ी से निकल रही थी। पहली नज़र में तो ये कोई सामान्य गाड़ी लग रही थी, लेकिन जब पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उसे रोका, तो मामला कुछ और ही निकला। गाड़ी की तलाशी लेने पर अंदर से निकलीं 19 पेटी देशी शराब — कुल 171 लीटर प्लेन क्वालिटी, जिसकी कीमत ₹85,200 आँकी गई है।

यह खेप सिरोंज रोड की तरफ ले जाई जा रही थी, लेकिन बैरसिया पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए इसे जब्त कर लिया। जिस इनोवा (मार्केट वैल्यू ₹12 लाख) में यह शराब ले जाई जा रही थी, वह भी कब्जे में ली गई है। कुल ज़ब्त माल की कीमत लगभग ₹12.85 लाख है।

गाड़ी चला रहा युवक, आयुष राजपूत, पुलिस की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ जारी है कि यह शराब कहां से लाई गई थी और किसे डिलीवर की जानी थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।

बैरसिया पुलिस ने सख्त संदेश दिया है कि अब इलाके में शराब तस्करी का धंधा नहीं चलने दिया जाएगा। जो इस अवैध काम में लिप्त हैं, उन्हें चेतावनी दी गई है — अगली इनोवा कब पकड़ी जाएगी, किसी को पता नहीं।

भोपाल: शिक्षा मंडल में पुताई घोटाला उजागर, उप यंत्री विनोद मंडराई पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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संपादक-इकबाल खान

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भोपाल, मध्य प्रदेश की राजधानी एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर गई है। इस बार मामला माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़ा हुआ है, जहां लाखों रुपये का पुताई कार्य सिर्फ कागज़ों में दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई काम हुआ ही नहीं। यह पूरा प्रकरण विभागीय कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

इस घोटाले में मुख्य भूमिका उप यंत्री विनोद मंडराई की मानी जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से एक ठेकेदार के नाम पर भुगतान करवा दिया। एकल सत्य समाचार पत्र के द्वारा लेटर पैड पर दिए गए फोन नंबर पर ठेकेदार से चर्चा करने का प्रयास किया गया ताकि वास्तविक सत्यता क्या है लेकिन ठेकेदार कलेक्टर पेपर दिए गए फोन नंबर पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फोन उठाकर बताया गया कि वह किसी असलम ठेकेदार को नहीं जानते हैं शिकायतकर्ता मुईद खान के संदेश से मामला तब और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि विभाग ने एशियन पेंट जैसी प्रमाणित कंपनी से कोटेशन लिया, परंतु कार्य व बिल स्थानीय ठेकेदार के नाम दर्शाया गया। सरकारी नियमों के अनुसार, केवल अधिकृत निर्माता ही ऐसे कार्यों के लिए पात्र होते हैं। यहां न तो कोई टेंडर निकाला गया, न ही किसी प्रकार की सार्वजनिक सूचना दी गई। असलम के लेटरहेड पर न केवल पुताई सामग्री का विवरण था, बल्कि मजदूरों—पेंटर, सहायक पेंटर, सफाईकर्मी और हेल्पर के नाम—तक जोड़कर भुगतान दर्शाया गया है, जिससे फर्जीवाड़ा और भी स्पष्ट होता है। मध्य प्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 कभी उल्लंघन किया गया है।

विनोद मंडराई पहले भी कई संदिग्ध निर्माण कार्यों में संलिप्त रहे हैं। कामों को लेकर भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त की जा चुकी है। इसके बावजूद उन्हें विभाग में अहम जिम्मेदारियाँ मिलती रही हैं। अब्दुल मुईद खान का आरोप है कि मंडराई अपने पद का दुरुपयोग कर अब शाहपुरा A सेक्टर में एक आलीशान मकान का मालिक बन चुके हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन संपत्तियों की स्थिति और सुविधाएं देख कर साफ ज़ाहिर होता है कि यह संपत्ति उनकी वैध आय से कहीं अधिक है। जिसकी सही से जांच हो जाए तो न जाने और कितनी संपत्ति का खुलासा हो सकता है।

सबसे गंभीर बात यह है कि मंडराई आज भी पदस्थ हैं और खुद ही अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को भेज रहे हैं। यह स्थिति न केवल जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नियमों और प्रक्रियाओं की पूरी तरह अनदेखी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत आरोपी अधिकारी को जांच के दौरान पद से हटाना अनिवार्य है, ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सके।

यह मामला केवल एक आर्थिक घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता की जड़ें हिलाने वाला मामला बन गया है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रकरण जनता के विश्वास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और भविष्य में भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा देगा।