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मकरानी समाज के अध्यक्ष खालिक मकरानी ने भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल से की शिष्टाचार भेंट

भोपाल, 22 जुलाई 2025 — आज भोपाल में भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल से मकरानी समाज के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार खालिक मकरानी ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच सामाजिक मुद्दों, मीडिया की भूमिका और समाज के विकास से जुड़ी विभिन्न पहलुओं पर सकारात्मक चर्चा हुई। मकरानी ने मकरानी समाज के उत्थान एवं युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर कुछ सुझाव भी साझा किए, जिन्हें अग्रवाल ने सहर्ष स्वीकार किया। यह मुलाकात सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

जातिगत जनगणना को लेकर मुस्लिम समाज एक आवाज भोपाल की अहम बैठक संपन्न

भोपाल दिनांक 16 जुलाई 2025 आज मुस्लिम समाज एक आवाज, भोपाल की ओर से जातिगत जनगणना 2027 के विषय पर एक महत्वपूर्ण मीटिंग कोह-ए-फ़िज़ा, भोपाल में आयोजित की गई। इस बैठक में सभी समाजों के अध्यक्षों एवं कमेटी सदस्यों को आमंत्रित किया गया था।

इस अवसर पर सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे तथा इस बात पर चर्चा हुई कि आने वाले समय में जातिगत जनगणना से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ समाज के सभी वर्गों तक कैसे पहुँचाई जाएँ। लगभग सभी समाजों के अध्यक्ष इस बैठक में उपस्थित रहे।

मकरानी समाज, जिला भोपाल के अध्यक्ष एवं पत्रकार श्री खालिक मकरानी ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि जातिगत जनगणना के लिए सभी समाजों को एकजुट होकर तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि जनगणना में भाग लेना न सिर्फ हमारा हक है, बल्कि हमारा फर्ज भी है। इससे हमें डरना नहीं है उन्होंने इस अवसर अपने-अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने जैसे कुछ महत्वपूर्ण सुझवों जानकारियाँ भी साझा कीं।

भोपाल के वार्ड 70 में भैंसों की डेयरी बनी लोगों के लिए नर्क, जिम्मेदार कर रहे अनदेखी

भोपाल-राजधानी भोपाल के रूपनगर क्षेत्र, वार्ड क्रमांक 70 के निवासी वर्षों से भैंसों की डेयरी के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। शहर के बीचों-बीच संचालित यह डेयरी इलाके में गंदगी, दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का कारण बन रही है। स्थानीय रहवासी लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है।

यह स्थिति तब है जब न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि शहर के आवासीय क्षेत्रों, विशेषकर मध्य क्षेत्र में, किसी भी प्रकार की पशु डेयरी का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। इसके बावजूद वार्ड 70 में वर्षों से चल रही यह डेयरी आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रही है। रहवासियों ने कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं — नालियों में गोबर और पेशाब बहने लगता है, जिससे मच्छरों और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अब लोग सवाल कर रहे हैं — जब कोर्ट का आदेश है, तो फिर यह लापरवाही क्यों? क्या जिम्मेदार अफसर किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं?

स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और रहवासी चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस अवैध डेयरी को वहां से हटाया जाए ताकि वे भी स्वच्छ और सुरक्षित जीवन जी सकें।

भोपाल के रूप नगर में नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अवैध दूध डेयरियों का संचालन बेरोकटोक जारी है। बिना किसी अनुमति के, नियमों को ताक पर रखकर इन इलाकों में डेयरियाँ चलाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को लगातार गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

शहर के नियम साफ़ कहते हैं कि नगर निगम सीमा क्षेत्र के भीतर और खासकर रिहायशी इलाकों में एक भी डेयरी संचालित नहीं होनी चाहिए। अगर किसी कॉलोनी में डेयरी पाई जाती है, तो उस पर डेयरी संचालक को एक वर्ष की सजा और प्रत्येक पशु पर ₹1,000 का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। लेकिन हकीकत में निगम की कार्रवाई महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायत मिलने या कभी-कभार अधिकारी के आदेश पर मामूली जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है — नतीजा, अवैध डेरी वहीं की वहीं जमी रहती है।

ACP बिट्टू शर्मा का एक्शन मोड!

भोपाल-जहांगीराबाद संभाग की कमान संभालते ही एसीपी बिट्टू शर्मा एक्शन मोड में नजर आ रही हैं। मध्य प्रदेश पुलिस की तेजतर्रार और कर्मठ महिला अधिकारियों में शुमार बिट्टू शर्मा की छवि एक सख्त लेकिन न्यायप्रिय अफसर की रही है। उन्होंने अपने अब तक के करियर में कई संवेदनशील और जिम्मेदारी भरे पदों पर उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। उप पुलिस अधीक्षक, रेल, भोपाल के रूप में रेलवे सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और यात्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने सख्त निगरानी रखते हुए सराहनीय काम किया। इसके अलावा संपत्ति प्रकोष्ठ (Property Cell) सहित कई अन्य शाखाओं में भी उन्होंने ईमानदारी और दक्षता के साथ काम किया है।

अब उन्हें भोपाल की नगरीय पुलिस व्यवस्था के तहत जहांगीराबाद संभाग का सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) नियुक्त किया गया है। इस संभाग के अंतर्गत थाना जहांगीराबाद, थाना बजरिया और थाना ऐशबाग जैसे तीन बड़े, संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण थाने आते हैं। यह क्षेत्र अपराध, ट्रैफिक और भीड़भाड़ के लिहाज़ से काफी सक्रिय माना जाता है। बिट्टू शर्मा ने कार्यभार संभालते ही निगरानी और नियंत्रण को प्राथमिकता दी है। वह एक ऐसी अधिकारी मानी जाती हैं जो फील्ड में रहकर व्यवस्था को सुधारने में यकीन रखती हैं। उनकी नियुक्ति से जहांगीराबाद संभाग में पुलिसिंग को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

भोपाल से हमारे संवाददाता क़य्युम पठान की खास रिपोर्ट।

क्राइम ब्रांच में जमे आधा दर्जन अंगद हुए लाइन अटैच।

भोपाल-भोपाल पुलिस महकमे में एक बार फिर “एकल सत्य न्यूज़” की रिपोर्ट का बड़ा असर देखने को मिला है। सालों से क्राइम ब्रांच में जमे जिन ‘अंगदों’ पर हमारी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे, उन पर आखिरकार गाज गिर ही गई। डीजीपी के सख्त निर्देशों के बाद राजधानी की सबसे चर्चित यूनिट क्राइम ब्रांच से 6 पुलिसकर्मियों को हटाकर लाइन भेज दिया गया। ये वे कर्मचारी थे, जो वर्षों से अपनी पोस्टिंग पर जमे हुए थे और जिनकी वजह से क्राइम ब्रांच अक्सर विवादों और चर्चाओं में रहती थी।

सूत्रों की मानें तो क्राइम ब्रांच में इन कर्मचारियों को हटाना आसान नहीं था। अधिकारियों की अंदरूनी पसंद-नापसंद, सिफारिशों और पुराने नेटवर्क के चलते इन ‘अंगदों’ को छूना लगभग नामुमकिन माना जा रहा था। लेकिन “एकल सत्य न्यूज़” की पड़ताल और खुलासों के बाद महकमे में हलचल मच गई और डीजीपी ने पूरी गंभीरता से मामला संज्ञान में लेते हुए बड़ा एक्शन लिया।

लाइन भेजे गए पुलिसकर्मियों में कार्यवाहक एएसआई रामकुमार गौतम, एएसआई धीरज पांडे, आरक्षक पलकराज चौधरी, नीरज यादव, मुकेश सोलंकी और प्रधान आरक्षक गजराज सिंह के नाम शामिल हैं। रामकुमार गौतम 2016 से क्राइम ब्रांच में जमे हुए थे, बाकी सभी भी 5 से 8 साल से इसी यूनिट में कार्यरत थे।

सबसे ज्यादा चर्चा में रहे आरक्षक पलकराज चौधरी, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर खुद को ‘अंगद’ बताते हुए लिखा था – “मैं अंगद हूं, जहां जाता हूं जम जाता हूं।” यह पोस्ट डीजीपी के स्पष्ट आदेशों के खिलाफ मानी गई और विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। अब वही ‘अंगद’ लाइन में खड़ा है – और शायद समझ चुका है कि पुलिस सेवा अब सोशल मीडिया स्टेटस से नहीं, जिम्मेदारी से चलेगी।

इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट हो गया है कि अब भोपाल पुलिस महकमे में ‘मनमानी’ नहीं चलेगी। डीजीपी की इस बड़ी पहल को पुलिसिंग में अनुशासन और जवाबदेही की ओर एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह संदेश भी साफ है – चाहे कोई भी हो, कितना भी पुराना क्यों न हो, सिस्टम से ऊपर कोई नहीं।

भोपाल पुलिस में फिर लौटे ‘अंगद’, डीजीपी के निर्देशों की खुली अवहेलना

भोपाल-राजधानी भोपाल के थानों में एक बार फिर ‘अंगदों’ की वापसी ने पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीजीपी के सख्त निर्देशों पर हटाए गए पुलिसकर्मी अब मौखिक आदेशों के जरिए फिर से पुराने थानों में लौट आए हैं,।जिसमें मिसरोद, बागसेवनिया, अशोका गार्डन, क्राइम ब्रांच समेत कई थानों में पहले हटाए गए कर्मचारियों की वापसी हो गई है।

क्राइम ब्रांच की बात करें तो यहां के अधिकारी अपने चहेतों को छोड़ना ही नहीं चाहते क्योंकि इन्हीं बचे कूचे कर्मचारियों से क्राइम ब्रांच चल रही ऐसा माना जा रहा है, जबकि इनके काम फील्ड ड्यूटी से तो दूर इनके तैनाती से भी नहीं हो रहे पूरे, इनके जामें होने से अकसर विवादों में और सुर्खियों ने रहता है क्राइम ब्रांच। 5 साल से अधिक हो गए जमें पर मजाल की अंगदो की सूची में अजाए, इसके बावजूद अधिकारियों को नहीं दिख रहे है यह आधा दर्जन अंगद, क्राइम ब्रांच को सुर्खियों में लाने ठेका जो इन्होंने ले रखा है..अधिकारी भी नस्मस्तक है इनके सामने…. सूत्र तो बहुत कुछ बताते हैं लेकिन सब कुछ लिख पाना संभव नहीं है

यह वो 6 कर्मचारी है जो क्राइम ब्रांच में 5 साल से अधिक हो जाने के बाद भी जमे हुए हैं, जो साफ तौर पर तबादला आदेशों की अनदेखी का सबूत हैं।

कार्यवाहक एएसआई रामकुमार गौतम ( 2576) इन साहब ने अपराध शाखा में 02.05.2016 को रखे थे अपने शुभ कदम,आज दिनांक तक उनके कदम किसी और थाने में नहीं पड़े क्योंकि क्राइम ब्रांच की पूरी कलाकारी और लफड़ेबाजी की जिम्मेदारी इन्हीं के जिम्मे जो दे रखी है अधिकारियों ने ऐसा पुलिस सूत्रों का कहना है, मनमर्जी नौकरी के मालिक हो गए रामकुमार गौतम, दो बार विवादों में रहने के बाद हो चुके तबादलों के बाद भी नहीं दी आमद, क्योंकि क्राइम ब्रांच का नहीं छूट रहा मोह, क्या लेते है सेवाएं और क्या देते है अधिकारियों को सेवाएं… कौन जानता है, कैसे बचे अंगदो की सूची से अब तक, साहब के हाथों डीसीपी अपराध के रीडर शिप का काम है…. पर तबादला सूची में साइबर क्राइम ब्रांच किया गया क्राइम ब्रांच से तबादला, अब जब रीडर का काम देखते है एएसआई गौतम तो क्या करेंगे साइबर का काम, कौन इनके तबादले का जिम्मेदार….

इसी तरह कार्यवाहक एएसआई धीरज पांडे जो 16.05.2017 से और आरक्षक पलकराज चौधरी 23.04.2017 से क्राइम ब्रांच में तैनात है, दोनों k पास कोई काम नहीं सिर्फ एडीसीपी कार्यालय में तैनात है, इसी के साथ आरक्षक नीरज यादव 23.04.2017, आरक्षक मुकेश कुमार सोलंकी 21.11.2016 और प्रधान आरक्षक गजराज सिंह 07.08.2020 से क्राइम ब्रांच में तैनात है, क्या यह आरक्षक अंगदो से कम है या अधिकारियों के चाहेते, कौन जिम्मेदार और किस सूची में दिखेगा इनका दूसरे थानों के लिए नाम…

क्राइम ब्रांच में पदस्थ कुछ आरक्षक तो खुलेआम सोशल मीडिया पर खुद को ‘अंगद’ कहते हुए स्टेटस डाल रहे हैं — “मैं अंगद हूं, जहां जाता हूं जम जाता हूं”, जो डीजीपी के निर्देशों को खुली चुनौती जैसा लगता है।

राजधानी में बीते दिनों विभागीय जांच के चलते मिसरोद थाना प्रभारी मनीष राज भदौरिया को और क्राइम ब्रांच में पदस्थ आरक्षक मुरली शर्मा को लाइन हाजिर किया गया है, लेकिन उसी केस में शामिल एक एएसआई और आरक्षक पर अधिकारियों की नहीं पड़ी अब तक नजर।

यह वो एएसआई और आरक्षक जो बाकी रह गए

एएसआई दिनेश खजुरिया वर्तमान में थाना अशोका गार्डन में और एहसान खान (अरेरा हिल्स में नौकरी कर रहे अब भी बचे हुए हैं,

वहीं अंगदो में शुमार प्रधान आरक्षक आलोक तिवारी, जिनकी नौकरी अधिकारी नहीं ले पाते, यह साहब खुद करते है अपने हिसाब से लोगोनक कल्याण….

आलोक तिवारी पर हबीबगंज में पदस्थ रहते हुए एक महिला से पैसे लेने के आरोप में लाइन हाजिर किया गया था, अधिकारियों की मजाल जो लाइन में रख ले, आलोक तिवारी ने चंद दिनों में अरेरा हिल्स करा लिया था अपना तबादला, यहां भी साहब को नहीं आया मज़ा तो साहब ने अपने रिश्तेदार टीआई के पास दे दी आमद।

अब आलोक तिवारी कोहेफिज़ा थाने में मनमर्जी से तैनात हो गए, बताया जाता है कि संबंधित थाना प्रभारी उनके रिश्तेदार हैं, ऐसा वो खुद कहते नजर आते है।

इन घटनाओं से साफ है कि राजधानी की पुलिस व्यवस्था अब भी रिश्तेदारी, जुगाड़ और मौखिक आदेशों पर चल ही रही है — न कि नियमों और आदेशों पर। सवाल ये है कि क्या डीजीपी के निर्देश अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?

महिला से छेड़छाड़ और मारपीट,पति की शिकायत करने पर उल्टा भेजा गया जेल

भोपाल-भोपाल के बिलखिरिया थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला ने IG देहात से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि उसके पति की गैरमौजूदगी में तीन लोगों ने उसके घर में घुसकर न केवल उसके साथ छेड़छाड़ की, बल्कि मारपीट भी की।

महिला का आरोप है-

महिला का कहना है कि जब वह अपने पति के साथ आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची, तो वहां एक आरोपी पहले से मौजूद था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने महिला की शिकायत पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने न सिर्फ उनकी बात अनसुनी कर दी, बल्कि उल्टा उसके पति के साथ थाने में ही मारपीट की गई और उस पर ही मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया। पीड़ित पक्ष अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।

भोपाल से हमारे संवाददाता क़य्युम पठान की खास रिपोर्ट।

पटना में व्यापारी को जान का खतरा, आरोपी पर मारपीट और रंगदारी का आरोप

पटना: मालसलामी थाना क्षेत्र के स्थायी निवासी रविंद्र कुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें सुधीर मालाह उर्फ सुधीर केवट से जान का खतरा है। रविंद्र कुमार की दुकान करमाली चक, थाना बाईपास क्षेत्र में स्थित है। उनका कहना है कि सुधीर मालाह न केवल उनके दुकान में घुसकर मारपीट करता है, बल्कि पैसे की छीना-झपटी और रंगदारी की भी मांग करता है। रविंद्र ने बताया कि उन्होंने इस मामले की लिखित शिकायत पुलिस और प्रशासन को दी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि डर के माहौल में वह हर रोज़ अपनी जान की सलामती को लेकर चिंतित रहते हैं और अब दर-दर भटकने को मजबूर हो गए हैं। पीड़ित ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा मिल सके।

RTI आरटीआई कैसे डालें?

●RTI क्या है?

सबसे पहले हमें ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर RTI होती क्या है,RTI का मतलब होता है Right to Information (सूचना का अधिकार) यह एक ऐसा कानून है जो भारत के हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी मांग सकता है। चाहे वो स्कूलों में खर्च हुआ पैसा हो, पंचायत में आया फंड हो, या किसी सरकारी कर्मचारी का कार्य व्यवहार।

RTI Act 2005 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के लगभग सभी विभाग इसके अंतर्गत आते हैं।

🧾सबसे पहले ये जान ले कि RTI डालने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?

  1. एक साफ और सरल भाषा में लिखा RTI आवेदन पत्र।
  2. संबंधित विभाग या अधिकारी का नाम और पता।
  3. 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर या RTI शुल्क।
  4. अगर आप BPL श्रेणी में आते हैं तो शुल्क नहीं देना होता, लेकिन प्रमाणपत्र जरूरी है।
  5. डाक के माध्यम से भेजने के लिए लिफाफा।

●RTI आवेदन पत्र कैसे लिखें?

यहां एक सामान्य प्रारूप (Format) दिया गया है:

सेवा में,
जन सूचना अधिकारी
[विभाग का नाम]
[कार्यालय का पता]

विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत सूचना प्राप्त करने हेतु आवेदन।

महोदय,
मैं [आपका नाम], निवासी [पूरा पता] हूं। मैं RTI Act 2005 के तहत निम्नलिखित जानकारी प्राप्त करना चाहता/चाहती हूं:

  1. ……………………………………….
  2. ……………………………………….

मैं 10 रुपये का RTI शुल्क पोस्टल ऑर्डर के माध्यम से संलग्न कर रहा/रही हूं।
कृपया नियमानुसार 30 दिनों के भीतर सूचना प्रदान करें।

भवदीय,
[नाम]
[पता]
[मोबाइल नंबर]
[दिनांक]

●RTI कहां जमा करें?

  1. RTI आवेदन पत्र डाक द्वारा संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी (PIO) को भेजा जा सकता है।
  2. आप चाहें तो विभाग के RTI ऑफिस में जाकर खुद भी जमा कर सकते हैं।
  3. कुछ विभागों के लिए आप ऑनलाइन RTI आवेदन भी कर सकते हैं— नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप ऑफिसियल वेबसाइट पर जा सकते है।
https://rtionline.gov.in: RTI आरटीआई कैसे डालें?

●RTI शुल्क कितना है?

श्रेणी शुल्क

सामान्य नागरिक ₹10/- (पोस्टल ऑर्डर या नकद)
BPL कार्डधारी निःशुल्क (प्रमाणपत्र संलग्न करें)
अतिरिक्त पेज (फोटोकॉपी) ₹2/- प्रति पेज

●मांगी गई जानकारी या उत्तर मिलने में कितना समय लगता है?

ज्यादातर मामलों में RTI Act के अनुसार, आपको 30 दिनों के भीतर जवाब मिल जाना चाहिए। अगर मामला जीवन और मृत्यु से जुड़ा हो तो 48 घंटे में सूचना देना अनिवार्य है।

सभी मिलकर करें शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर –SDM लहार ने दिए सख्त निर्देश

भिंड में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एसडीएम विजय सिंह यादव ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। यह बैठक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मिहोना में आयोजित की गई, जिसमें विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा, बीआरसी पी.एस. तोमर सहित सात संकुल प्राचार्य, तीन बीएसी और छह सीएसी उपस्थित रहे। बैठक में नवीन शैक्षणिक सत्र की तैयारी, शिक्षक और छात्र उपस्थिति, नामांकन 3.0 पोर्टल, पाठ्यपुस्तक वितरण, मध्यान्ह भोजन योजना, छात्रवृत्ति, खाद्यान्न उठाव और स्कूल निरीक्षण जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।

एसडीएम ने निर्देश दिए कि सभी संकुल प्राचार्य एवं सीएसी अधिकारी महीने में कम से कम 15 से 20 भ्रमण सुनिश्चित करें। केवल निरीक्षण ही नहीं, बल्कि वे स्वयं कक्षाओं में जाकर पढ़ाएं और शिक्षण गुणवत्ता का स्तर जांचें। एसडीएम ने यह भी कहा कि लापरवाह और गैरहाजिर शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने विशेष रूप से प्रयोगशालाओं की स्थिति पर चिंता जताई और सभी हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाएं बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने का केंद्र होती हैं, इसलिए प्रयोगशाला उपकरणों की खरीदी में कोई लापरवाही न हो।

एसडीएम विजय सिंह यादव ने कहा कि वे स्वयं स्कूलों का सतत निरीक्षण करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षण की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो। शासन द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम समयसीमा में पूरा हो और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले – यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।