Bhopal– मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रेलवे पुलिस को कुख्यात गैंग के लीडर को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।जीआरपी थाना प्रभारी जहीर खान के कुशल नेतृत्व में गठित टीम ने हरियाणा के कुख्यात सांसी गैंग के वारंटी संदीप पिता दलवीर सिंह (उम्र 30 वर्ष), निवासी ग्राम खेड़ी, थाना हांसी, जिला हिसार (हरियाणा) को 10 साल पुराने मामलों में रोहतक, हरियाणा से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। संदीप के खिलाफ कुल 12 वारंट लंबित थे, जिनमें 11 स्थायी वारंट और 1 गिरफ्तारी वारंट शामिल हैं। वह हरियाणा की सांसी गैंग का लीडर है, जिसकी तलाश जीआरपी भोपाल पुलिस को लंबे समय से थी।
संदीप 7 सदस्यीय गिरोह का सरगना है और जीआरपी भोपाल का गैंग हिस्ट्रीशीटर भी है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर ट्रेनों में चोरी सहित दर्जनों गंभीर आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया है। विभिन्न मामलों में उस पर कुल ₹35,000 का इनाम घोषित था। जीआरपी टीम ने समयावधि के भीतर वारंटी संदीप को माननीय न्यायालय, भोपाल में पेश किया। यह गिरफ्तारी जीआरपी भोपाल के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मध्य प्रदेश में शराब तस्करी का कारोबार दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है अवैध शराब का कारोबार करने वाले फिल्म देख कर नए-नए तरीके से शराब के कारोबार को करते रहते हैं लेकिन पुलिस भी इसे दो कदम आगे ही रहती ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें शराब तस्करी के लिए लग्जरी कर का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन पुलिस ने शराब तस्कर ऑन को गिरफ्तार सारी योजना फेल कर दी है बैरसिया के विदिशा रोड पर देर रात एक सफेद इनोवा तेज़ी से निकल रही थी। पहली नज़र में तो ये कोई सामान्य गाड़ी लग रही थी, लेकिन जब पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उसे रोका, तो मामला कुछ और ही निकला। गाड़ी की तलाशी लेने पर अंदर से निकलीं 19 पेटी देशी शराब — कुल 171 लीटर प्लेन क्वालिटी, जिसकी कीमत ₹85,200 आँकी गई है।
यह खेप सिरोंज रोड की तरफ ले जाई जा रही थी, लेकिन बैरसिया पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए इसे जब्त कर लिया। जिस इनोवा (मार्केट वैल्यू ₹12 लाख) में यह शराब ले जाई जा रही थी, वह भी कब्जे में ली गई है। कुल ज़ब्त माल की कीमत लगभग ₹12.85 लाख है।
गाड़ी चला रहा युवक, आयुष राजपूत, पुलिस की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ जारी है कि यह शराब कहां से लाई गई थी और किसे डिलीवर की जानी थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।
बैरसिया पुलिस ने सख्त संदेश दिया है कि अब इलाके में शराब तस्करी का धंधा नहीं चलने दिया जाएगा। जो इस अवैध काम में लिप्त हैं, उन्हें चेतावनी दी गई है — अगली इनोवा कब पकड़ी जाएगी, किसी को पता नहीं।
भोपाल, मध्य प्रदेश की राजधानी एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर गई है। इस बार मामला माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़ा हुआ है, जहां लाखों रुपये का पुताई कार्य सिर्फ कागज़ों में दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई काम हुआ ही नहीं। यह पूरा प्रकरण विभागीय कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इस घोटाले में मुख्य भूमिका उप यंत्री विनोद मंडराई की मानी जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से एक ठेकेदार के नाम पर भुगतान करवा दिया। एकल सत्य समाचार पत्र के द्वारा लेटर पैड पर दिए गए फोन नंबर पर ठेकेदार से चर्चा करने का प्रयास किया गया ताकि वास्तविक सत्यता क्या है लेकिन ठेकेदार कलेक्टर पेपर दिए गए फोन नंबर पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फोन उठाकर बताया गया कि वह किसी असलम ठेकेदार को नहीं जानते हैं शिकायतकर्ता मुईद खान के संदेश से मामला तब और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि विभाग ने एशियन पेंट जैसी प्रमाणित कंपनी से कोटेशन लिया, परंतु कार्य व बिल स्थानीय ठेकेदार के नाम दर्शाया गया। सरकारी नियमों के अनुसार, केवल अधिकृत निर्माता ही ऐसे कार्यों के लिए पात्र होते हैं। यहां न तो कोई टेंडर निकाला गया, न ही किसी प्रकार की सार्वजनिक सूचना दी गई। असलम के लेटरहेड पर न केवल पुताई सामग्री का विवरण था, बल्कि मजदूरों—पेंटर, सहायक पेंटर, सफाईकर्मी और हेल्पर के नाम—तक जोड़कर भुगतान दर्शाया गया है, जिससे फर्जीवाड़ा और भी स्पष्ट होता है। मध्य प्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 कभी उल्लंघन किया गया है।
विनोद मंडराई पहले भी कई संदिग्ध निर्माण कार्यों में संलिप्त रहे हैं। कामों को लेकर भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त की जा चुकी है। इसके बावजूद उन्हें विभाग में अहम जिम्मेदारियाँ मिलती रही हैं। अब्दुल मुईद खान का आरोप है कि मंडराई अपने पद का दुरुपयोग कर अब शाहपुरा A सेक्टर में एक आलीशान मकान का मालिक बन चुके हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन संपत्तियों की स्थिति और सुविधाएं देख कर साफ ज़ाहिर होता है कि यह संपत्ति उनकी वैध आय से कहीं अधिक है। जिसकी सही से जांच हो जाए तो न जाने और कितनी संपत्ति का खुलासा हो सकता है।
सबसे गंभीर बात यह है कि मंडराई आज भी पदस्थ हैं और खुद ही अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को भेज रहे हैं। यह स्थिति न केवल जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नियमों और प्रक्रियाओं की पूरी तरह अनदेखी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत आरोपी अधिकारी को जांच के दौरान पद से हटाना अनिवार्य है, ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सके।
यह मामला केवल एक आर्थिक घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता की जड़ें हिलाने वाला मामला बन गया है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रकरण जनता के विश्वास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और भविष्य में भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा देगा।
भोपाल के थाना हनुमानगंज क्षेत्र में फर्जी लूट की योजना रचने वाले टाटा कंज्यूमर कंपनी के डीएसआर आदित्य आर्य समेत चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आदित्य ने 28 मई को शिकायत दर्ज कराई थी कि दो बाइक सवार युवकों ने जेपी नगर तिराहे के पास उसका आईफोन 15 और ₹60-70 हजार रुपये कलेक्शन से भरा बैग लूट लिया। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि यह लूट की कहानी झूठी थी, जिसे आदित्य ने ऑनलाइन सट्टे में हारे पैसे छुपाने के लिए रचा था।
ऑनलाइन सट्टा बना फर्जी वारदात की वजह, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आए- आदित्य ने अपने दोस्त दीपांश योगी और अन्य साथियों – आशिफ अली, प्रदीप यादव व अमन खान के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। लूट का पूरा प्लान वाट्सऐप कॉल पर तय किया गया था। घटना के बाद आदित्य ने आशिफ को ₹3500 देकर बैग वापस भी ले लिया था। पुलिस ने डियो स्कूटर, एक ओपो मोबाइल जब्त कर लिया है जबकि आईफोन 15 की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपी प्रदीप यादव पहले से हत्या और लूट समेत 14 मामलों में आरोपी है, जबकि अन्य के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया। विदिशा निवासी कपिल लीलानी (45) भोपाल एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी आखिरी डिब्बे में चढ़ते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की खाली जगह में गिर गए।
घटना के वक्त स्टेशन पर ड्यूटी कर रहे रेलवे अटेंडेंट अरहम ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए बिना समय गंवाए शोर मचाया और पास ही मौजूद ट्रेन मैनेजर वैभव भारतीय को सूचित किया। मैनेजर ने तत्परता दिखाते हुए एमरजेंसी ब्रेक लगाई।
रेल कर्मचारियों की त्वरित और समन्वित कार्रवाई से कपिल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। गनीमत रही कि यात्री को केवल मामूली खरोंचें आईं। हादसे के बाद कुछ देर के लिए ट्रेन रोकी गई और फिर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद रवाना कर दी गई।
भोपाल के ग्राम पंचायत अरवलिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक मजबूर महिला के मकान पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई है। पीड़िता, श्रीमती रफत, गंभीर बीमारी के चलते बीते 20 दिनों से अपने मायके में रहकर इलाज करवा रही थीं। जब वे इलाज के बाद अपने घर लौटीं, तो उन्होंने देखा कि उनके मकान का ताला टूटा हुआ है और किसी व्यक्ति ने न केवल ताला बदल दिया है, बल्कि मकान की दीवार पर अपना नाम और मोबाइल नंबर भी लिखवा दिया है।
यह व्यक्ति मोहम्मद शेहजाद खान बताया जा रहा है, जिससे रफत ने उक्त मकान की विधिवत रजिस्ट्री करवा कर खरीदारी की थी। अब वही व्यक्ति खुद को मालिक बताते हुए महिला को धमका रहा है और मकान खाली करने का दबाव बना रहा है। यह मामला न केवल भूमाफिया की दबंगई को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
श्रीमती रफत का कहना है कि जब उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए स्थानीय थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय जोन 4 का रुख किया, तो उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, कार्रवाई नहीं। उन्हें इधर-उधर भटकाया गया और उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
इस तरह की घटनाएं राजधानी भोपाल में लगातार बढ़ रही हैं, जिनमें अकेली महिलाओं और बुजुर्गों की संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। यह न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज में असुरक्षा का माहौल भी पैदा करता है।
एकल सत्य समाचार, भोपाल। जिला शिक्षा केंद्र भोपाल के जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) ओपी शर्मा इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल एक कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर चर्चा में हैं। इस संबंध में एकल सत्य समाचार से बातचीत करते हुए डीपीसी शर्मा ने स्पष्ट किया कि ऑडियो में जिन पैसों की बात हो रही है, वे रिश्वत नहीं बल्कि सरकारी राशि है, जो एडवांस के रूप में दी गई थी।
ओपी शर्मा ने कहा, “मैंने केवल सरकारी कार्य के लिए दी गई एडवांस राशि की वापसी को लेकर कॉल की थी। इसे कुछ लोगों द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, ताकि मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।”
उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारियों को जिम्मेदारियों के अनुसार राशि दी जाती है और नियमानुसार उसका हिसाब भी मांगा जाता है। “यह पूरी प्रक्रिया शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होती है,” शर्मा ने कहा।
डीपीसी शर्मा ने इस बात से साफ इनकार किया कि उन्होंने किसी कर्मचारी से पद या कार्य के बदले पैसे की मांग की है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाएं दुर्भावनापूर्ण हैं और इस मामले में वे वांछित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।
नगर निगम भोपाल का वाहन चालक संघ एक बार फिर विवादों में घिर गया है। जानकारी के अनुसार, संघ ने बिना किसी वैध आवंटन या अनुमति पत्र के नगर निगम की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। यह कब्जा न केवल नियमों की अवहेलना है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।
इतना ही नहीं, वाहन चालक संघ ने करोद क्षेत्र स्थित नवाब कॉलोनी में भी एक कार्यालय पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है। स्थानीय लोगों और निगम सूत्रों के अनुसार, उक्त स्थल पर किसी प्रकार की कानूनी स्वीकृति या अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है और जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। जोन 21 के zo मामले की जांच में जुटे हुए हैं लेकिन कहीं ना कहीं वाहन चालक संघ के दबाव में जांच प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं वही एक कर्मचारी ने चर्चा में बताया कि कार्यालय खाली करने के लिए वाहन चालक संघ को नोटिस चश्मा किया जा चुका है आगे की कार्रवाई के लिए आप zo से बात करें वही स्पष्ट बता पाएंगे कि मामले में देरी क्यों की जा रही है हालांकि अवैध कब्जे को लेकर महापौर में भी जिम्मेदार अधिकारियों को जिताया है कि जल्द से जोन के कार्यालय में हुए अवैध कब्जे को हटाया जाए पर जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे की बगल में नजर आ रहे हैं
भोपाल। शहर के नजूल वृत्त अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में व्याप्त गंदगी और गेट के सामने जमा गंदे पानी ने आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए इस कार्यालय में आते हैं, लेकिन कार्यालय तक पहुंचने से पहले उन्हें गंदगी और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
स्थानीय लोगों और कार्यालय आने वाले नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। कार्यालय परिसर में साफ-सफाई का अभाव और जल निकासी की सही व्यवस्था न होना इस बदहाल स्थिति की मुख्य वजह है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी रास्ते से एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी जैसे उच्च अधिकारी रोजाना गुजरते हैं, लेकिन वे आंखें मूंदे बैठे हैं। अगर वे चाहें तो नगर निगम अथवा संबंधित विभाग को निर्देश देकर इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता साफ झलक रही है।
नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि जब कार्यालय में बैठने वाले अधिकारी ही अपनी कार्यस्थली की हालत सुधारने में रुचि नहीं ले रहे हैं, तो आम जनता की समस्याओं को वे कैसे समझेंगे। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द कार्यालय परिसर की सफाई करवाई जाए और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या न केवल असुविधा बल्कि संक्रामक बीमारियों का कारण भी बन सकती है। प्रशासन की यह लापरवाही निंदनीय है और उच्च अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
आज हमारा पर्यावरण कराह रहा है—वायु दूषित हो चुकी है, पेड़ों की छांव खत्म होती जा रही है, और हर सांस में बीमारी घुलती जा रही है। लेकिन सोचिए, अगर हम सब यह ठान लें कि अपने हर खास मौके पर—जन्मदिन, सालगिरह, माता-पिता की पुण्यतिथि, या किसी गरीब की अंतिम विदाई पर—सिर्फ पाँच पेड़ लगाएं, तो आने वाला कल कितना सुंदर हो सकता है। पेड़ केवल छाया या ऑक्सीजन नहीं देते, वो उम्मीद देते हैं, जीवन देते हैं।
सरकार को चाहिए कि वह ऐसी योजनाएं बनाए जिसमें हर सरकारी कर्मचारी अपने वेतन से पहले यह साबित करे कि उसने कम से कम एक पेड़ लगाया है। और जिनके पास स्थान नहीं, उनके लिए जगह चिन्हित की जाए, ताकि कोई बहाना न बचे।
हमें यह भी समझना होगा कि जितना बड़ा योगदान पेड़ कटाई से होता है, उतना ही बड़ा खतरा आधुनिक सुख-सुविधाओं से भी है। हर परिवार में एक से अधिक वाहन पर सख्त नियंत्रण हो, और जरूरत से ज्यादा साधनों पर भारी कर लगाया जाए।
याद रखिए, जब एक इंसान पांच पेड़ लगाएगा, तो देश में करोड़ों पेड़ लगेंगे। वह दिन दूर नहीं जब हवा फिर से शुद्ध होगी, फल-सब्जियों में फिर से स्वाद होगा, और हर बच्चा बिना मास्क के मुस्कुरा पाएगा। यह सिर्फ एक पहल नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे कीमती तोहफा है। पेड़ लगाइए, आने वाले कल को बचाइए—क्योंकि जीवन हरियाली से ही है।
“अगर वाकई किसी की याद को अमर करना है, तो उसकी याद में एक पेड़ जरूर लगाइए। वो पेड़ आपके प्यार की सबसे जीवित निशानी होगा।”