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पंचायतों की उन्नति का प्रतीक बना PAI 1.0, भोपाल की उत्कृष्ट पंचायतें हुईं सम्मानित

भोपाल, 7 अगस्त 2025। ईटीसी भोपाल में आज पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI 1.0) वर्ष 2022-23 का भव्य विमोचन एवं जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष माननीय श्रीमती रामकुंवर नवरंग सिंह गुर्जर ने की। दीप प्रज्वलन और अतिथि स्वागत के साथ प्रारंभ हुए इस समारोह में जिले की ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर उन्हें पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम में PAI 1.0 के 9 प्रमुख विषयों के आधार पर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की गई। इस सूचकांक के अनुसार, ग्राम पंचायत बिशनखेड़ी को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ और ₹11,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। वहीं, ग्राम पंचायत बंगरसिया द्वितीय (₹7,100) और नांदनी तृतीय (₹5,100) स्थान पर रहीं। इसके अतिरिक्त बरखेड़ा सालम, बरखेड़ी अब्दुल्ला, झिरनिया, डोब, कुठार, बरखेड़ा बरामद और धूतखेड़ी पंचायतों को ₹2,100 एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। अन्य 10 पंचायतों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया और सभी पंचायतों का TMP पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी किया गया।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने इस अवसर पर पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पंचायतों की मेहनत का परिणाम है। अब आवश्यकता है कि सभी पंचायतें शासन की योजनाओं को जमीन पर और बेहतर ढंग से लागू करें, ताकि आमजन तक इनका लाभ पहुंचे।

सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायत उन्नति सूचकांक सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा और सुधार का माध्यम भी है। यह सामाजिक और आर्थिक संकेतकों के आधार पर पंचायतों को आत्ममूल्यांकन का अवसर देता है।

कार्यक्रम के दौरान श्री सुबेन्द्र यादव (डीपीएम, आरजीएसए) ने सूचकांक की विस्तृत जानकारी साझा की और बताया कि PAI 1.0 स्थानीय विकास को केंद्र में रखते हुए तैयार किया गया है। यह सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप पंचायतों की प्रगति को आंकने का सशक्त माध्यम है।

कार्यक्रम का संचालन श्री सुबेन्द्र यादव ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. नताशा फिरदौश (डीसी, आरजीएसए) ने किया। इस अवसर पर सीईओ जनपद पंचायत फंदा श्रीमती शिवानी मिश्रा, उपाध्यक्ष श्री मोहन जाट, पंचायत प्रतिनिधि, अधिकारी, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

टोल वसूली के बावजूद बदहाल सड़कें! 11 मील पर स्थित बाईपास पर खतरे का सफर।

भोपाल:मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से महज कुछ दूरी पर आनंद नगर से 11 मील के पास स्थित बाईपास की हालत बेहद खस्ताहाल बनी हुई है। यही वह स्थान है जहां टोल नाका भी संचालित है, और वाहन चालकों से नियमित रूप से शुल्क वसूला जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात है कि टोल वसूली के बावजूद सड़क की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

इस जर्जर सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और टूटी परतें आए दिन दुर्घटना का कारण बन रही हैं। यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को मरम्मत में भारी नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं खराब सड़क के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

नियमो के अनुसार देखा जाए तो-

टोल वसूली के नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों और संग्रह) नियम, 2008 के तहत टोल ऑपरेटर की यह जिम्मेदारी होती है कि वह मार्ग की नियमित देखरेख और मरम्मत सुनिश्चित करे। यदि सड़क तय मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो उस स्थिति में टोल वसूली अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है।

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि टोल टैक्स तो समय पर लिया जा रहा है, लेकिन सुविधा के नाम पर केवल जान का जोखिम है। लोगों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि या तो सड़क की स्थिति तत्काल सुधारी जाए या फिर जब तक सड़क दुरुस्त नहीं होती, टोल वसूली पर रोक लगाई जाए।

शव उठाने में नहीं मिला सहयोग, पुलिस ने दिखाई मानवता की मिसाल


भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र स्थित भदभदा बांध के पास शनिवार को एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की उम्र करीब 40 से 45 वर्ष बताई जा रही है, और उसकी जेब से कोई पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिले। केवल उसके बाएं हाथ पर सिख समुदाय से जुड़ा धार्मिक चिन्ह का टैटू मिला है। शव की जानकारी मिलते ही एएसआई नंदकिशोर दुबे और आरक्षक विनीत यादव तत्काल मौके पर पहुंचे और पूरी संवेदनशीलता से मामले की पड़ताल की। नगर निगम का शव वाहन भी मौके पर बुलाया गया, लेकिन जहां शव मिला था, वह इलाका सुनसान था और कोई भी व्यक्ति मदद के लिए आगे नहीं आया।

ऐसे कठिन समय में पुलिस ने न केवल अपना कर्तव्य निभाया, बल्कि मानवता की मिसाल भी पेश की। एएसआई दुबे और वाहन चालक ने खुद मिलकर शव को स्ट्रेचर पर रखा और बांध के किनारे से ऊपर सड़क तक पहुंचाया। यह क्षण न सिर्फ भावुक करने वाला था, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब समाज मुंह मोड़ लेता है, तब भी पुलिस निष्ठा और मानवीय संवेदना के साथ अपने फर्ज को निभाती है। पुलिस को अंदेशा है कि मृतक मछली पकड़ने आया था और किसी कारणवश पानी में डूब गया। शव की पहचान के लिए आसपास के थानों में जानकारी भेजी गई है तथा सोशल मीडिया के जरिए तस्वीरें साझा की जा रही हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिको लीगल संस्थान भेजा गया है।

मकरानी समाज के अध्यक्ष खालिक मकरानी ने भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल से की शिष्टाचार भेंट

भोपाल, 22 जुलाई 2025 — आज भोपाल में भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल से मकरानी समाज के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार खालिक मकरानी ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच सामाजिक मुद्दों, मीडिया की भूमिका और समाज के विकास से जुड़ी विभिन्न पहलुओं पर सकारात्मक चर्चा हुई। मकरानी ने मकरानी समाज के उत्थान एवं युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर कुछ सुझाव भी साझा किए, जिन्हें अग्रवाल ने सहर्ष स्वीकार किया। यह मुलाकात सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

जातिगत जनगणना को लेकर मुस्लिम समाज एक आवाज भोपाल की अहम बैठक संपन्न

भोपाल दिनांक 16 जुलाई 2025 आज मुस्लिम समाज एक आवाज, भोपाल की ओर से जातिगत जनगणना 2027 के विषय पर एक महत्वपूर्ण मीटिंग कोह-ए-फ़िज़ा, भोपाल में आयोजित की गई। इस बैठक में सभी समाजों के अध्यक्षों एवं कमेटी सदस्यों को आमंत्रित किया गया था।

इस अवसर पर सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे तथा इस बात पर चर्चा हुई कि आने वाले समय में जातिगत जनगणना से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ समाज के सभी वर्गों तक कैसे पहुँचाई जाएँ। लगभग सभी समाजों के अध्यक्ष इस बैठक में उपस्थित रहे।

मकरानी समाज, जिला भोपाल के अध्यक्ष एवं पत्रकार श्री खालिक मकरानी ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि जातिगत जनगणना के लिए सभी समाजों को एकजुट होकर तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि जनगणना में भाग लेना न सिर्फ हमारा हक है, बल्कि हमारा फर्ज भी है। इससे हमें डरना नहीं है उन्होंने इस अवसर अपने-अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने जैसे कुछ महत्वपूर्ण सुझवों जानकारियाँ भी साझा कीं।

भोपाल के वार्ड 70 में भैंसों की डेयरी बनी लोगों के लिए नर्क, जिम्मेदार कर रहे अनदेखी

भोपाल-राजधानी भोपाल के रूपनगर क्षेत्र, वार्ड क्रमांक 70 के निवासी वर्षों से भैंसों की डेयरी के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। शहर के बीचों-बीच संचालित यह डेयरी इलाके में गंदगी, दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का कारण बन रही है। स्थानीय रहवासी लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है।

यह स्थिति तब है जब न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि शहर के आवासीय क्षेत्रों, विशेषकर मध्य क्षेत्र में, किसी भी प्रकार की पशु डेयरी का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। इसके बावजूद वार्ड 70 में वर्षों से चल रही यह डेयरी आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रही है। रहवासियों ने कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं — नालियों में गोबर और पेशाब बहने लगता है, जिससे मच्छरों और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अब लोग सवाल कर रहे हैं — जब कोर्ट का आदेश है, तो फिर यह लापरवाही क्यों? क्या जिम्मेदार अफसर किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं?

स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और रहवासी चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस अवैध डेयरी को वहां से हटाया जाए ताकि वे भी स्वच्छ और सुरक्षित जीवन जी सकें।

भोपाल के रूप नगर में नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अवैध दूध डेयरियों का संचालन बेरोकटोक जारी है। बिना किसी अनुमति के, नियमों को ताक पर रखकर इन इलाकों में डेयरियाँ चलाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को लगातार गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

शहर के नियम साफ़ कहते हैं कि नगर निगम सीमा क्षेत्र के भीतर और खासकर रिहायशी इलाकों में एक भी डेयरी संचालित नहीं होनी चाहिए। अगर किसी कॉलोनी में डेयरी पाई जाती है, तो उस पर डेयरी संचालक को एक वर्ष की सजा और प्रत्येक पशु पर ₹1,000 का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। लेकिन हकीकत में निगम की कार्रवाई महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायत मिलने या कभी-कभार अधिकारी के आदेश पर मामूली जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है — नतीजा, अवैध डेरी वहीं की वहीं जमी रहती है।

ACP बिट्टू शर्मा का एक्शन मोड!

भोपाल-जहांगीराबाद संभाग की कमान संभालते ही एसीपी बिट्टू शर्मा एक्शन मोड में नजर आ रही हैं। मध्य प्रदेश पुलिस की तेजतर्रार और कर्मठ महिला अधिकारियों में शुमार बिट्टू शर्मा की छवि एक सख्त लेकिन न्यायप्रिय अफसर की रही है। उन्होंने अपने अब तक के करियर में कई संवेदनशील और जिम्मेदारी भरे पदों पर उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। उप पुलिस अधीक्षक, रेल, भोपाल के रूप में रेलवे सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और यात्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने सख्त निगरानी रखते हुए सराहनीय काम किया। इसके अलावा संपत्ति प्रकोष्ठ (Property Cell) सहित कई अन्य शाखाओं में भी उन्होंने ईमानदारी और दक्षता के साथ काम किया है।

अब उन्हें भोपाल की नगरीय पुलिस व्यवस्था के तहत जहांगीराबाद संभाग का सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) नियुक्त किया गया है। इस संभाग के अंतर्गत थाना जहांगीराबाद, थाना बजरिया और थाना ऐशबाग जैसे तीन बड़े, संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण थाने आते हैं। यह क्षेत्र अपराध, ट्रैफिक और भीड़भाड़ के लिहाज़ से काफी सक्रिय माना जाता है। बिट्टू शर्मा ने कार्यभार संभालते ही निगरानी और नियंत्रण को प्राथमिकता दी है। वह एक ऐसी अधिकारी मानी जाती हैं जो फील्ड में रहकर व्यवस्था को सुधारने में यकीन रखती हैं। उनकी नियुक्ति से जहांगीराबाद संभाग में पुलिसिंग को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

भोपाल से हमारे संवाददाता क़य्युम पठान की खास रिपोर्ट।

क्राइम ब्रांच में जमे आधा दर्जन अंगद हुए लाइन अटैच।

भोपाल-भोपाल पुलिस महकमे में एक बार फिर “एकल सत्य न्यूज़” की रिपोर्ट का बड़ा असर देखने को मिला है। सालों से क्राइम ब्रांच में जमे जिन ‘अंगदों’ पर हमारी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे, उन पर आखिरकार गाज गिर ही गई। डीजीपी के सख्त निर्देशों के बाद राजधानी की सबसे चर्चित यूनिट क्राइम ब्रांच से 6 पुलिसकर्मियों को हटाकर लाइन भेज दिया गया। ये वे कर्मचारी थे, जो वर्षों से अपनी पोस्टिंग पर जमे हुए थे और जिनकी वजह से क्राइम ब्रांच अक्सर विवादों और चर्चाओं में रहती थी।

सूत्रों की मानें तो क्राइम ब्रांच में इन कर्मचारियों को हटाना आसान नहीं था। अधिकारियों की अंदरूनी पसंद-नापसंद, सिफारिशों और पुराने नेटवर्क के चलते इन ‘अंगदों’ को छूना लगभग नामुमकिन माना जा रहा था। लेकिन “एकल सत्य न्यूज़” की पड़ताल और खुलासों के बाद महकमे में हलचल मच गई और डीजीपी ने पूरी गंभीरता से मामला संज्ञान में लेते हुए बड़ा एक्शन लिया।

लाइन भेजे गए पुलिसकर्मियों में कार्यवाहक एएसआई रामकुमार गौतम, एएसआई धीरज पांडे, आरक्षक पलकराज चौधरी, नीरज यादव, मुकेश सोलंकी और प्रधान आरक्षक गजराज सिंह के नाम शामिल हैं। रामकुमार गौतम 2016 से क्राइम ब्रांच में जमे हुए थे, बाकी सभी भी 5 से 8 साल से इसी यूनिट में कार्यरत थे।

सबसे ज्यादा चर्चा में रहे आरक्षक पलकराज चौधरी, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर खुद को ‘अंगद’ बताते हुए लिखा था – “मैं अंगद हूं, जहां जाता हूं जम जाता हूं।” यह पोस्ट डीजीपी के स्पष्ट आदेशों के खिलाफ मानी गई और विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। अब वही ‘अंगद’ लाइन में खड़ा है – और शायद समझ चुका है कि पुलिस सेवा अब सोशल मीडिया स्टेटस से नहीं, जिम्मेदारी से चलेगी।

इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट हो गया है कि अब भोपाल पुलिस महकमे में ‘मनमानी’ नहीं चलेगी। डीजीपी की इस बड़ी पहल को पुलिसिंग में अनुशासन और जवाबदेही की ओर एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह संदेश भी साफ है – चाहे कोई भी हो, कितना भी पुराना क्यों न हो, सिस्टम से ऊपर कोई नहीं।

भोपाल पुलिस में फिर लौटे ‘अंगद’, डीजीपी के निर्देशों की खुली अवहेलना

भोपाल-राजधानी भोपाल के थानों में एक बार फिर ‘अंगदों’ की वापसी ने पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीजीपी के सख्त निर्देशों पर हटाए गए पुलिसकर्मी अब मौखिक आदेशों के जरिए फिर से पुराने थानों में लौट आए हैं,।जिसमें मिसरोद, बागसेवनिया, अशोका गार्डन, क्राइम ब्रांच समेत कई थानों में पहले हटाए गए कर्मचारियों की वापसी हो गई है।

क्राइम ब्रांच की बात करें तो यहां के अधिकारी अपने चहेतों को छोड़ना ही नहीं चाहते क्योंकि इन्हीं बचे कूचे कर्मचारियों से क्राइम ब्रांच चल रही ऐसा माना जा रहा है, जबकि इनके काम फील्ड ड्यूटी से तो दूर इनके तैनाती से भी नहीं हो रहे पूरे, इनके जामें होने से अकसर विवादों में और सुर्खियों ने रहता है क्राइम ब्रांच। 5 साल से अधिक हो गए जमें पर मजाल की अंगदो की सूची में अजाए, इसके बावजूद अधिकारियों को नहीं दिख रहे है यह आधा दर्जन अंगद, क्राइम ब्रांच को सुर्खियों में लाने ठेका जो इन्होंने ले रखा है..अधिकारी भी नस्मस्तक है इनके सामने…. सूत्र तो बहुत कुछ बताते हैं लेकिन सब कुछ लिख पाना संभव नहीं है

यह वो 6 कर्मचारी है जो क्राइम ब्रांच में 5 साल से अधिक हो जाने के बाद भी जमे हुए हैं, जो साफ तौर पर तबादला आदेशों की अनदेखी का सबूत हैं।

कार्यवाहक एएसआई रामकुमार गौतम ( 2576) इन साहब ने अपराध शाखा में 02.05.2016 को रखे थे अपने शुभ कदम,आज दिनांक तक उनके कदम किसी और थाने में नहीं पड़े क्योंकि क्राइम ब्रांच की पूरी कलाकारी और लफड़ेबाजी की जिम्मेदारी इन्हीं के जिम्मे जो दे रखी है अधिकारियों ने ऐसा पुलिस सूत्रों का कहना है, मनमर्जी नौकरी के मालिक हो गए रामकुमार गौतम, दो बार विवादों में रहने के बाद हो चुके तबादलों के बाद भी नहीं दी आमद, क्योंकि क्राइम ब्रांच का नहीं छूट रहा मोह, क्या लेते है सेवाएं और क्या देते है अधिकारियों को सेवाएं… कौन जानता है, कैसे बचे अंगदो की सूची से अब तक, साहब के हाथों डीसीपी अपराध के रीडर शिप का काम है…. पर तबादला सूची में साइबर क्राइम ब्रांच किया गया क्राइम ब्रांच से तबादला, अब जब रीडर का काम देखते है एएसआई गौतम तो क्या करेंगे साइबर का काम, कौन इनके तबादले का जिम्मेदार….

इसी तरह कार्यवाहक एएसआई धीरज पांडे जो 16.05.2017 से और आरक्षक पलकराज चौधरी 23.04.2017 से क्राइम ब्रांच में तैनात है, दोनों k पास कोई काम नहीं सिर्फ एडीसीपी कार्यालय में तैनात है, इसी के साथ आरक्षक नीरज यादव 23.04.2017, आरक्षक मुकेश कुमार सोलंकी 21.11.2016 और प्रधान आरक्षक गजराज सिंह 07.08.2020 से क्राइम ब्रांच में तैनात है, क्या यह आरक्षक अंगदो से कम है या अधिकारियों के चाहेते, कौन जिम्मेदार और किस सूची में दिखेगा इनका दूसरे थानों के लिए नाम…

क्राइम ब्रांच में पदस्थ कुछ आरक्षक तो खुलेआम सोशल मीडिया पर खुद को ‘अंगद’ कहते हुए स्टेटस डाल रहे हैं — “मैं अंगद हूं, जहां जाता हूं जम जाता हूं”, जो डीजीपी के निर्देशों को खुली चुनौती जैसा लगता है।

राजधानी में बीते दिनों विभागीय जांच के चलते मिसरोद थाना प्रभारी मनीष राज भदौरिया को और क्राइम ब्रांच में पदस्थ आरक्षक मुरली शर्मा को लाइन हाजिर किया गया है, लेकिन उसी केस में शामिल एक एएसआई और आरक्षक पर अधिकारियों की नहीं पड़ी अब तक नजर।

यह वो एएसआई और आरक्षक जो बाकी रह गए

एएसआई दिनेश खजुरिया वर्तमान में थाना अशोका गार्डन में और एहसान खान (अरेरा हिल्स में नौकरी कर रहे अब भी बचे हुए हैं,

वहीं अंगदो में शुमार प्रधान आरक्षक आलोक तिवारी, जिनकी नौकरी अधिकारी नहीं ले पाते, यह साहब खुद करते है अपने हिसाब से लोगोनक कल्याण….

आलोक तिवारी पर हबीबगंज में पदस्थ रहते हुए एक महिला से पैसे लेने के आरोप में लाइन हाजिर किया गया था, अधिकारियों की मजाल जो लाइन में रख ले, आलोक तिवारी ने चंद दिनों में अरेरा हिल्स करा लिया था अपना तबादला, यहां भी साहब को नहीं आया मज़ा तो साहब ने अपने रिश्तेदार टीआई के पास दे दी आमद।

अब आलोक तिवारी कोहेफिज़ा थाने में मनमर्जी से तैनात हो गए, बताया जाता है कि संबंधित थाना प्रभारी उनके रिश्तेदार हैं, ऐसा वो खुद कहते नजर आते है।

इन घटनाओं से साफ है कि राजधानी की पुलिस व्यवस्था अब भी रिश्तेदारी, जुगाड़ और मौखिक आदेशों पर चल ही रही है — न कि नियमों और आदेशों पर। सवाल ये है कि क्या डीजीपी के निर्देश अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?

महिला से छेड़छाड़ और मारपीट,पति की शिकायत करने पर उल्टा भेजा गया जेल

भोपाल-भोपाल के बिलखिरिया थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला ने IG देहात से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि उसके पति की गैरमौजूदगी में तीन लोगों ने उसके घर में घुसकर न केवल उसके साथ छेड़छाड़ की, बल्कि मारपीट भी की।

महिला का आरोप है-

महिला का कहना है कि जब वह अपने पति के साथ आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची, तो वहां एक आरोपी पहले से मौजूद था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने महिला की शिकायत पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने न सिर्फ उनकी बात अनसुनी कर दी, बल्कि उल्टा उसके पति के साथ थाने में ही मारपीट की गई और उस पर ही मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया। पीड़ित पक्ष अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।

भोपाल से हमारे संवाददाता क़य्युम पठान की खास रिपोर्ट।