ग्राम परवा खेड़ा की विवादित भूमि पर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान ईटखेड़ी थाना प्रभारी आशीष सप्रे को लाइन अटैच करने और फिर 24 घंटे के भीतर ही आदेश वापस लेने की प्रक्रिया ने यह संकेत दिया है कि प्रारंभिक कार्रवाई पूरी जांच और तथ्यात्मक स्थिति जाने बिना जल्दबाज़ी में की गई थी। क्षेत्रीय नागरिकों का मानना है कि सप्रे की कार्यशैली हमेशा से अनुशासन, सक्रियता और कानून के प्रति प्रतिबद्ध रही है। विवादित भूमि और उससे जुड़ी गतिविधियों के मामलों में भी उन्होंने नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की थी। आदेश वापस लिए जाने से यह साफ हुआ कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पुष्ट नहीं थे और विभागीय निर्णय में जल्दबाज़ी की गई थी। जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आने पर आदेश वापस लेने का निर्णय यह दर्शाता है कि थाना प्रभारी पर की गई कार्रवाई का कोई ठोस आधार नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को अनावश्यक विवादों में न उलझाया जाए, ताकि पुलिस प्रशासन बिना किसी दबाव के निष्पक्ष रूप से कार्य कर सके।
थाना प्रभारी आशीष सप्रे के पक्ष में उठा समर्थन, आदेश वापसी ने सवालों को दिया स्पष्ट जवाब











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