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सूचना का अधिकार अब खतरे में: कांग्रेस ने केंद्र पर लगाया पारदर्शिता खत्म करने का आरोप

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ पर आयोजित प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, आरटीआई प्रकोष्ठ अध्यक्ष पुनीत टंडन और प्रदेश प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने कहा कि 2005 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में लागू हुआ यह कानून देश में पारदर्शिता और जवाबदेही की नींव बना, पर अब इसे कमजोर किया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि आरटीआई ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त किया और भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों का खुलासा किया। आरटीआई के ज़रिए सामने आए कुछ प्रमुख घोटाले —

आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला (मुंबई)

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला (2010)

2G स्पेक्ट्रम आवंटन मामला

मिड-डे मील घोटाले और मनरेगा में फर्जी भुगतान के केस

एमपीएलएडी फंड और पीएम केयर्स फंड के उपयोग में अस्पष्टता
इन सबने दिखाया कि आरटीआई भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का सबसे सशक्त औज़ार है।

कांग्रेस ने कहा कि 2019 के संशोधन और 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के कारण सूचना आयोगों की स्वायत्तता घट गई है। जनहित की सूचनाएँ अब “व्यक्तिगत जानकारी” बताकर रोकी जा रही हैं, जिससे लोकतंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर खतरा है।

सूचना आयोगों में रिक्तियाँ और लाखों लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए कांग्रेस ने मांग की कि 2019 के संशोधन रद्द किए जाएँ, आयोगों की स्वतंत्रता बहाल की जाए और व्हिसलब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट को तुरंत लागू किया जाए।

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