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विश्व पुस्तक मेला 2026 में युवा लेखिका अभिजिता गुप्ता की चौथी पुस्तक का विमोचनराष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और संतकवि सियारामशरण गुप्त की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाती अभिजिता

नई दिल्ली, जनवरी 2026: विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान युवा लेखिका और बाल प्रतिभा अभिजिता गुप्ता की चौथी पुस्तक ‘मार्क ऑफ द कीपर: वील ऑफ लाइट’ का विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जहां ऑथर्स कॉर्नर पर पाठकों, साहित्य प्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों की अच्छी उपस्थिति रही।

अभिजिता गुप्ता ने मात्र सात वर्ष की उम्र में लेखन की शुरुआत की और कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई। इससे पहले वे ‘वी विल श्योरली सस्टेन’, ‘टू बिगिन विद द लिटिल थिंग्स’ और ‘हैप्पीनेस इज़ ऑल अराउंड अस’ जैसी सराही गई पुस्तकों की लेखिका रह चुकी हैं। उनके लेखन में सामाजिक सोच, सकारात्मक संदेश और युवा दृष्टिकोण साफ दिखाई देता है। अब तक वे पांच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं।

वर्ष 2022 में दुबई में आयोजित ग्लोबल चाइल्ड प्रोडिजी अवॉर्ड्स में अभिजिता को साहित्य के क्षेत्र में सम्मानित किया गया, जहां वे इस श्रेणी की एकमात्र बाल लेखिका रहीं। उन्हें यह सम्मान नोबेल पुरस्कार विजेता सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स के हाथों प्राप्त हुआ। इसके अलावा, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने उन्हें 40 प्रेरणादायक युवाओं की सूची में शामिल किया है।

अभिजिता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और संतकवि सियारामशरण गुप्त की प्रपौत्री हैं। पुस्तक विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि फैंटेसी लेखन युवाओं को सोचने और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। यह आयोजन युवा प्रतिभा और साहित्यिक विरासत का उत्सव बना।

भोपाल देहात में अवैध कॉलोनियों का काला साम्राज्य — जनता लुटती रही, सिस्टम सोता रहा!

सालों तक चलती रही जमीन की अवैध मंडी, अब कलेक्टर के आदेश के बाद जागा प्रशासन — लेकिन इतने वर्षों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

भोपाल देहात बना अवैध कॉलोनाइजरों की राजधानी

भोपाल देहात के परवलिया सड़क और ईटखेड़ी थाना क्षेत्रों में बीते कई वर्षों से अवैध कॉलोनियों का ऐसा जाल बिछाया गया, जिसने पूरे इलाके की शक्ल ही बदल दी। खेतों को रातों-रात कॉलोनियों में तब्दील कर दिया गया, खेतों पर सड़कें डाल दी गईं, प्लॉट काट दिए गए और खुलेआम करोड़ों रुपये का खेल खेला गया।सब कुछ होता रहा —लेकिन प्रशासन अंधा बना रहा।राजस्व विभाग, नगर नियोजन, पंचायत, पुलिस और जिला प्रशासन — सभी की आंखों के सामने यह अवैध कारोबार फलता-फूलता रहा।

खेतों पर प्लॉट, प्लॉट पर मकान — कानून कहीं नजर नहीं आया

किसानों की जमीन को सस्ते दामों में खरीदा गया और फिर उसी जमीन को महंगे दामों पर प्लॉट काटकर बेच दिया गया।ना ले-आउट पास,ना कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन,ना नगर एवं ग्राम निवेश की अनुमति,ना सड़क-नाली की स्वीकृति।फिर भी लोगों को भरोसा दिलाया गया कि सब वैध है, सब सरकारी प्रक्रिया से हुआ है।आज वही लोग ठगे जाने का दर्द झेल रहे हैं।

जब जनता की गाढ़ी कमाई लुट रही थी, तब प्रशासन कहां था?

भोपाल देहात के कई गांवों में आम आदमी ने जीवन भर की कमाई जोड़कर एक छोटा सा प्लॉट खरीदा था। सपना था कि अपना घर बनेगा, बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा।लेकिन अब वही लोग डर के साये में जी रहे हैं कि कहीं उनकी जमीन अवैध घोषित न हो जाए।

जनता पूछ रही है —

जब कॉलोनियां बन रही थीं तब तहसीलदार क्यों चुप थे? जब सड़कें डल रही थीं तब पंचायत क्यों सो रही थी? जब प्लॉट बिक रहे थे तब पुलिस को क्यों कुछ नहीं दिखा?

अचानक जागा प्रशासन — कलेक्टर के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR

अब जाकर जिला कलेक्टर के आदेश के बाद पुलिस हरकत में आई है और परवलिया सड़क एवं ईटखेड़ी थाना क्षेत्रों में अवैध कॉलोनी निर्माण के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

लेकिन जनता कह रही है अगर यह सब अवैध था तो अब तक चुप्पी क्यों?क्या सिस्टम किसी बड़े इशारे का इंतजार कर रहा था?

सूत्रों के मुताबिक भोपाल देहात में सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध कॉलोनियां विकसित की गईं।हर प्लॉट हजारों रुपये प्रति वर्गफुट में बेचा गया।सिस्टम की खामोशी ने कॉलोनाइजर माफिया को खुला मैदान दे दिया।कलेक्टर के आदेश के बाद FIR तो दर्ज हो गई, लेकिन जनता को डर है कि कहीं यह कार्रवाई भी कुछ दिनों का ड्रामा बनकर न रह जाए।पहले भी कई बार अवैध कॉलोनियों पर नोटिस जारी हुए, अखबारों में खबरें छपीं, लेकिन फिर सब ठंडे बस्ते में चला गया।

इन इलाकों में होगी कार्रवाई– प्रशासन ने सेवनिया ओंकारा,कोलुआखुर्द, नरेला वाज्याफ्त, बंगरसिया, अरेड़ी, परेवाखेड़ा, हज्जामपुरा इंटखेड़ी सड़क, अरवलिया, चौपड़ा कलां, बांसिया, कोटर, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, सुरैया नगर, छावनी पठार, कान्हासैया, सिंकदराबाद, शोभापुर,जगदीशपुर,मुबारकपुर, जहेज, गोलखेड़ी और बसई को कार्रवाई के लिए चिह्नित किया है।

कोलार थाना पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा रैकेट का किया भंडाफोड़

थाना कोलार पुलिस ने आशियाना हाईट्स के फ्लैट नंबर 104 में चल रहे ऑनलाइन सट्टा गैंग को दाबोचने में में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है कुछ आरोपी अलग-अलग क्रिकेट मैचों पर सट्टा खिला रहे थे कोलार पुलिस को सूचना मिलते ही इस घटना से सहायक पुलिस आयुक्त चुनाभट्टी को अवगत कराकर सर्च वारंट प्राप्त किया गया। पुलिस टीम द्वारा मुखबिर के बताए स्थान पर दबिश दी गई, जहां फ्लैट का दरवाजा खोलने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अमित सुहाने बताया। सर्च वारंट से अवगत कराकर फ्लैट की तलाशी लेने पर वहां दो व्यक्ति पाए गए, जो लैपटॉप और मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे। तलाशी के दौरान फ्लैट से विभिन्न कंपनियों के 16 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप एवं सिम कार्ड बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम अमित सुहाने निवासी सागर एवं अमित रावत निवासी जबलपुर बताए तथा ऑनलाइन क्रिकेट मैचों में लोगों को तीन गुना पैसे का लालच देकर सट्टा खिलाने की बात स्वीकार की। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध अवैध सट्टा संचालन का अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में ले लिया है।

भोपाल में सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर की मानवीय पहल

सर्दी में जरूरतमंदों के लिए कम्बल वितरण कार्यक्रम आयोजित

भोपाल, मध्यप्रदेश।ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सामाजिक संस्था सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर (SBF) द्वारा भोपाल शहर में जरूरतमंद, गरीब एवं असहाय लोगों के लिए कम्बल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सामाजिक सेवा अभियान के अंतर्गत शहर की विभिन्न गरीब बस्तियों और झुग्गी क्षेत्रों में शिविर लगाकर ठंड से बचाव हेतु कम्बलों का वितरण किया गया, जिससे सैकड़ों जरूरतमंदों को राहत मिली।

सर्द मौसम में राहत पहुंचाने का प्रयास

भोपाल में लगातार गिरते तापमान के कारण खुले में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए सर्दी बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर ने यह सेवा कार्य प्रारंभ किया। कम्बल वितरण के दौरान संस्था के सदस्यों ने स्वयं बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई, जिससे लोगों के चेहरों पर संतोष और राहत देखने को मिली।

हर वर्ष किया जाता है सेवा कार्य

कार्यक्रम के संयोजक अतहर अहमद बेग ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कम्बल वितरण कार्यक्रम संस्था द्वारा प्रतिवर्ष नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर का उद्देश्य केवल सहायता देना ही नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।उन्होंने आगे कहा कि संस्था का प्रयास रहता है कि जो लोग आज सहायता प्राप्त कर रहे हैं, वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा बनें।

वर्ष भर चलती हैं सामाजिक गतिविधियां

अतहर अहमद बेग ने बताया कि SBF केवल ठंड के मौसम में ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता करती है। संस्था द्वारा विभिन्न त्योहारों, सामाजिक आयोजनों एवं विशेष अवसरों पर खाद्य सामग्री, वस्त्र, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण किया जाता है।इन गतिविधियों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में सहारा देना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।

आपदा प्रबंधन में भी निभाती है अहम भूमिका

सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर प्राकृतिक आपदाओं के समय भी सक्रिय भूमिका निभाती है। बाढ़, आगजनी, महामारी या अन्य आपात स्थितियों में संस्था के सदस्य सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग करते हैं।संस्था के स्वयंसेवक जरूरतमंदों तक भोजन, कपड़े और आवश्यक सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

स्थानीय लोगों ने की सराहना

कम्बल वितरण कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों ने संस्था के इस सेवा भाव की खुलकर सराहना की। लोगों ने कहा कि ऐसी सामाजिक संस्थाएं समाज में मानवता और सहयोग की भावना को मजबूत करती हैं।समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदमसोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर द्वारा किया गया यह सेवा कार्य समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का उदाहरण है। संस्था का यह प्रयास न केवल जरूरतमंदों को राहत प्रदान करता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी सेवा कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा देता है।

भोपाल परिवहन कार्यालय में कोड वर्ड में रिश्वत का खेल, बाबू-कर्मचारियों पर संरक्षण के आरोप

राजधानी भोपाल के परिवहन कार्यालय को लेकर एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां कागज पर कोड वर्ड लिखकर रिश्वत मांगे जाने की परंपरा चल रही है। बताया जा रहा है कि लर्निंग लाइसेंस शाखा में पदस्थ एक महिला कर्मचारी द्वारा लाइसेंस से जुड़े कार्य के बदले कथित तौर पर ₹400 की मांग की गई। पीड़ित व्यक्ति का आरोप है कि बिना रिश्वत दिए उसका काम करने से साफ इनकार कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी परिवहन कार्यालय में इसी तरह के कई प्रकरण उजागर हो चुके हैं, लेकिन आरोप है कि दोषी बाबू-कर्मचारियों पर केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामला दबा दिया जाता है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है। वहीं, कार्यालय में कर्मचारियों की अनियमित उपस्थिति, बिना रिश्वत काम न होना और सरकारी वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थान पर निजी लोगों से काम करवाए जाने जैसे आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।