थाना कोलार पुलिस ने आशियाना हाईट्स के फ्लैट नंबर 104 में चल रहे ऑनलाइन सट्टा गैंग को दाबोचने में में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है कुछ आरोपी अलग-अलग क्रिकेट मैचों पर सट्टा खिला रहे थे कोलार पुलिस को सूचना मिलते ही इस घटना से सहायक पुलिस आयुक्त चुनाभट्टी को अवगत कराकर सर्च वारंट प्राप्त किया गया। पुलिस टीम द्वारा मुखबिर के बताए स्थान पर दबिश दी गई, जहां फ्लैट का दरवाजा खोलने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अमित सुहाने बताया। सर्च वारंट से अवगत कराकर फ्लैट की तलाशी लेने पर वहां दो व्यक्ति पाए गए, जो लैपटॉप और मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे। तलाशी के दौरान फ्लैट से विभिन्न कंपनियों के 16 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप एवं सिम कार्ड बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम अमित सुहाने निवासी सागर एवं अमित रावत निवासी जबलपुर बताए तथा ऑनलाइन क्रिकेट मैचों में लोगों को तीन गुना पैसे का लालच देकर सट्टा खिलाने की बात स्वीकार की। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध अवैध सट्टा संचालन का अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में ले लिया है।
सर्दी में जरूरतमंदों के लिए कम्बल वितरण कार्यक्रम आयोजित
भोपाल, मध्यप्रदेश।ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सामाजिक संस्था सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर (SBF) द्वारा भोपाल शहर में जरूरतमंद, गरीब एवं असहाय लोगों के लिए कम्बल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सामाजिक सेवा अभियान के अंतर्गत शहर की विभिन्न गरीब बस्तियों और झुग्गी क्षेत्रों में शिविर लगाकर ठंड से बचाव हेतु कम्बलों का वितरण किया गया, जिससे सैकड़ों जरूरतमंदों को राहत मिली।
सर्द मौसम में राहत पहुंचाने का प्रयास
भोपाल में लगातार गिरते तापमान के कारण खुले में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए सर्दी बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर ने यह सेवा कार्य प्रारंभ किया। कम्बल वितरण के दौरान संस्था के सदस्यों ने स्वयं बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई, जिससे लोगों के चेहरों पर संतोष और राहत देखने को मिली।
हर वर्ष किया जाता है सेवा कार्य
कार्यक्रम के संयोजक अतहर अहमद बेग ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कम्बल वितरण कार्यक्रम संस्था द्वारा प्रतिवर्ष नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर का उद्देश्य केवल सहायता देना ही नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।उन्होंने आगे कहा कि संस्था का प्रयास रहता है कि जो लोग आज सहायता प्राप्त कर रहे हैं, वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा बनें।
वर्ष भर चलती हैं सामाजिक गतिविधियां
अतहर अहमद बेग ने बताया कि SBF केवल ठंड के मौसम में ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता करती है। संस्था द्वारा विभिन्न त्योहारों, सामाजिक आयोजनों एवं विशेष अवसरों पर खाद्य सामग्री, वस्त्र, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण किया जाता है।इन गतिविधियों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में सहारा देना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।
आपदा प्रबंधन में भी निभाती है अहम भूमिका
सोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर प्राकृतिक आपदाओं के समय भी सक्रिय भूमिका निभाती है। बाढ़, आगजनी, महामारी या अन्य आपात स्थितियों में संस्था के सदस्य सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग करते हैं।संस्था के स्वयंसेवक जरूरतमंदों तक भोजन, कपड़े और आवश्यक सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
स्थानीय लोगों ने की सराहना
कम्बल वितरण कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों ने संस्था के इस सेवा भाव की खुलकर सराहना की। लोगों ने कहा कि ऐसी सामाजिक संस्थाएं समाज में मानवता और सहयोग की भावना को मजबूत करती हैं।समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदमसोसाइटी फॉर ब्राइट फ्यूचर द्वारा किया गया यह सेवा कार्य समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का उदाहरण है। संस्था का यह प्रयास न केवल जरूरतमंदों को राहत प्रदान करता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी सेवा कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
राजधानी भोपाल के परिवहन कार्यालय को लेकर एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां कागज पर कोड वर्ड लिखकर रिश्वत मांगे जाने की परंपरा चल रही है। बताया जा रहा है कि लर्निंग लाइसेंस शाखा में पदस्थ एक महिला कर्मचारी द्वारा लाइसेंस से जुड़े कार्य के बदले कथित तौर पर ₹400 की मांग की गई। पीड़ित व्यक्ति का आरोप है कि बिना रिश्वत दिए उसका काम करने से साफ इनकार कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी परिवहन कार्यालय में इसी तरह के कई प्रकरण उजागर हो चुके हैं, लेकिन आरोप है कि दोषी बाबू-कर्मचारियों पर केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामला दबा दिया जाता है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है। वहीं, कार्यालय में कर्मचारियों की अनियमित उपस्थिति, बिना रिश्वत काम न होना और सरकारी वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थान पर निजी लोगों से काम करवाए जाने जैसे आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।