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थाना टीटी नगर पुलिस ने बड़ी वाहन चोरी का किया पर्दाफाश, 10 दोपहिया वाहन बरामद

भोपाल। थाना टीटी नगर पुलिस ने शहर में लगातार हो रही वाहन चोरी की घटनाओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से भोपाल के विभिन्न थाना क्षेत्रों से चोरी की गई कुल 10 दोपहिया मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है।

आगामी त्यौहारों को ध्यान में रखते हुए पुलिस आयुक्त श्री हरिनारायणाचारी मिश्र, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अवधेश गोस्वामी के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस उपायुक्त (जोन-1) श्री आशुतोष गुप्ता एवं अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (जोन-1) श्रीमती रश्मि अग्रवाल दुबे, सहायक पुलिस आयुक्त (टीटी नगर संभाग) श्रीमती अंकिता खातनकर के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी।


घटना का विवरण

दिनांक 10 अक्टूबर 2025 को फरियादी तरुण सिंह रावत ने अपनी मोटरसाइकिल (MP04 QQ 3639) तबाजी कैफे डिपो चौराहा के सामने पार्किंग में खड़ी की थी, जो कुछ समय बाद चोरी हो गई। मामले में अपराध क्रमांक 677/25 धारा 303(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने बाणगंगा दशहरा मैदान के पास दो संदिग्ध युवकों को बिना नंबर प्लेट की R15 बाइक पर घूमते देखा। पूछताछ में युवकों ने अपना नाम कासिम उर्फ दानिश खां (21 वर्ष) निवासी राजीव नगर और नदीम हसन (21 वर्ष) निवासी ऐशबाग बताया। वाहन की जांच में पता चला कि बाइक चोरी की है।

मनोवैज्ञानिक पूछताछ में दोनों ने टीटी नगर, कोलार, अयोध्यानगर, अशोका गार्डन, शाहजहांनाबाद, गोविंदपुरा और हनुमानगंज क्षेत्रों से वाहन चोरी करना स्वीकार किया। पुलिस ने दोनों के कब्जे से कुल 10 मोटरसाइकिलें बरामद कीं।


आरोपियों का विवरण

  1. नदीम हसन पिता नईम हसन (21 वर्ष)
    निवासी – मकबरे वाली मस्जिद के पास, बाग फरहत आफजा, ऐशबाग, भोपाल
    पूर्व प्रकरण – थाना कमलानगर में 379, 411 भादवि की चार बार चोरी के मामले दर्ज।
  2. कासिम उर्फ दानिश खां पिता अस्सू खां (21 वर्ष)
    निवासी – झुग्गी नं.2309, चार नाले के पास, राजीव नगर, मैदा मील रोड, एमपी नगर, भोपाल
    पूर्व प्रकरण – थाना अरेरा हिल्स में अपराध क्रमांक 189/24, धारा 324(2), 351(2), 3(5) बीएनएस दर्ज।

सराहनीय भूमिका

इस कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक गौरव सिंह दोहर, उनि राघवेन्द्र सिंह सिकरवार, सउनि कन्हैया लाल यादव, प्रआर अनंत सोमवंशी, प्रआर ऋषिकेश राय, प्रआर रविन्द्र पाल, प्रआर तरुण कुमार, प्रआर जगदीश बेले, प्रआर शिशुपाल सैनी, आर अरविन्द यादव, आर कपिल कौशिक, आर अविनाश भारती, आर रितेश तिवारी, आर धर्मबीर सिंह, आर गोविन्द प्रजापति, आर जालम सिंह, आर भगवान दास, आर शिवचरन, तकनीकी सहायता में आर पुष्पेन्द्र भदौरिया (जोन-1 कार्यालय) एवं आर मोहित दास (सायबर सेल) की भूमिका सराहनीय रही।

म.प्र. वक्फ बोर्ड मुख्यालय में एक दिवसीय काज़ी कॉन्फ्रेंस संपन्न

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऑनलाइन मार्गदर्शन दिया, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर दिया बल

भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड मुख्यालय में 14 अक्टूबर 2025 को एक दिवसीय काज़ी कॉन्फ्रेंस (कार्यशाला) का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल (कैबिनेट मंत्री दर्जा) ने की, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर सम्मेलन को संबोधित किया और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में वक्फ बोर्ड के प्रयासों की सराहना की।

इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश के मुस्लिम समाज को भारत सरकार और राज्य शासन के आत्मनिर्भर भारत के अभियान से जोड़ना, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा एवं विकास पर चर्चा करना तथा वक्फ कानून 2025 की रोशनी में पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना था।

कॉन्फ्रेंस में रियासत भोपाल के काज़ी-ए-शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, काजी सैयद इशरत अली (अध्यक्ष, म.प्र. काजी काउंसिल), काजी खलीक उर्रहमान (उपाध्यक्ष, काजी काउंसिल), मुफ्ती अबुल कलाम कासमी (मुफ्ती-ए-शहर, भोपाल) सहित प्रदेशभर के लगभग सभी जिलों के काज़ी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई।

काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने समाज में फैली बुराइयों पर नियंत्रण और शादी-निकाह को इबादत के रूप में संपन्न करने की बात कही। उन्होंने देशप्रेम के तहत स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। काजी सैयद इशरत अली ने सुझाव दिया कि वक्फ की कीमती संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग इमामों और मोअज्जिनों के वेतन में सुधार हेतु किया जाए।

काजी खलीक उर्रहमान ने भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के स्वदेशी वस्तुओं के आह्वान को समर्थन देते हुए कहा कि हमें देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लेना चाहिए। मुफ्ती अबुल कलाम कासमी ने अपने बयान में कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग कोई राजनीतिक विषय नहीं बल्कि शरीयत के अनुरूप एक नेक कार्य है, जो देश को मज़बूत बनाता है।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने अपने संबोधन में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, विकास और पारदर्शी प्रबंधन की दिशा में बोर्ड द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने काज़ी साहिबानों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्रोत्साहित करें।

सम्मेलन के दौरान बोर्ड अधिकारियों ने वक्फ कानून 2025, उम्मीद सेंट्रल पोर्टल, वक्फ शिक्षा नीति “पढ़ो-पढ़ाओ राष्ट्र निर्माण में भागीदारी बनो”, कृषि भूमि नीलामी, कानूनी सहायता, पट्टा अनुबंध प्रक्रिया, स्वास्थ्य सेवाओं हेतु वक्फ संपत्तियों में सस्ती जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना और वक्फ खातों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से जोड़ने जैसे विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के समापन पर मध्यप्रदेश काजी काउंसिल और रियासत भोपाल के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से यह घोषणा की कि वे स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने हेतु प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए देश में बनी वस्तुओं का उपयोग राष्ट्रहित में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वक्फ बोर्ड द्वारा आयोजित इस काज़ी कॉन्फ्रेंस को सराहनीय पहल बताते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं।

सूचना का अधिकार अब खतरे में: कांग्रेस ने केंद्र पर लगाया पारदर्शिता खत्म करने का आरोप

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ पर आयोजित प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, आरटीआई प्रकोष्ठ अध्यक्ष पुनीत टंडन और प्रदेश प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने कहा कि 2005 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में लागू हुआ यह कानून देश में पारदर्शिता और जवाबदेही की नींव बना, पर अब इसे कमजोर किया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि आरटीआई ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त किया और भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों का खुलासा किया। आरटीआई के ज़रिए सामने आए कुछ प्रमुख घोटाले —

आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला (मुंबई)

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला (2010)

2G स्पेक्ट्रम आवंटन मामला

मिड-डे मील घोटाले और मनरेगा में फर्जी भुगतान के केस

एमपीएलएडी फंड और पीएम केयर्स फंड के उपयोग में अस्पष्टता
इन सबने दिखाया कि आरटीआई भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का सबसे सशक्त औज़ार है।

कांग्रेस ने कहा कि 2019 के संशोधन और 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के कारण सूचना आयोगों की स्वायत्तता घट गई है। जनहित की सूचनाएँ अब “व्यक्तिगत जानकारी” बताकर रोकी जा रही हैं, जिससे लोकतंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर खतरा है।

सूचना आयोगों में रिक्तियाँ और लाखों लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए कांग्रेस ने मांग की कि 2019 के संशोधन रद्द किए जाएँ, आयोगों की स्वतंत्रता बहाल की जाए और व्हिसलब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट को तुरंत लागू किया जाए।

फसल काट ले गए दबंग, पुलिस कर रही आराम!

सीहोर जिले के श्यामगढ़ क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला किसान की सालभर की मेहनत पर दबंगों ने दिन-दहाड़े कब्जा कर लिया। बरखेड़ा गांव की शारदा बाई लोधी ने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को दिए अपने लिखित आवेदन में बताया कि उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 2/1/3 और 2/2/3 (कुल 12 एकड़) में बोई गई फसल को कुछ दबंगों ने जबरन काट लिया।

पीड़िता के अनुसार, घटना 6 अक्टूबर 2025 की है जब जवाहरसिंह पिता मोतीलाल, राहुल पिता जवाहरसिंह, दिनेश पिता किशोरीलाल, राजाराम, ओंकारसिंह, राजू पिता किशोरीलाल, संतोष, हार्दिकप्रसाद और सोनारसिंह सहित कई लोगों ने एकजुट होकर खेत में घुसकर उसकी मेहनत की पूरी फसल काट ली। जब शारदा बाई को इस घटना की सूचना मिली और उन्होंने विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें धमकाया और किसी तरह का नुकसान भरपाई देने से भी इनकार कर दिया।

महिला किसान का कहना है कि वह अकेले मेहनत करके खेती करती हैं, पर उनकी मेहनत पर दबंगों ने डाका डाल दिया और अब तक किसी भी आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दिए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की दबंगई की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस केवल कागज़ी कार्रवाई तक सीमित है।

शारदा बाई ने जिला प्रशासन से अपील की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और महिला किसान को न्याय दिलाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह उच्च अधिकारियों तक अपनी आवाज़ पहुंचाएँगी।

और अब सवाल उठता है — जब शिकायत दर्ज हो चुकी है, सबूत मौजूद हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर कब तक किसान यूँ ही लुटते रहेंगे और पुलिस खामोश बैठेगी?