भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया। विदिशा निवासी कपिल लीलानी (45) भोपाल एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी आखिरी डिब्बे में चढ़ते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की खाली जगह में गिर गए।
घटना के वक्त स्टेशन पर ड्यूटी कर रहे रेलवे अटेंडेंट अरहम ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए बिना समय गंवाए शोर मचाया और पास ही मौजूद ट्रेन मैनेजर वैभव भारतीय को सूचित किया। मैनेजर ने तत्परता दिखाते हुए एमरजेंसी ब्रेक लगाई।
रेल कर्मचारियों की त्वरित और समन्वित कार्रवाई से कपिल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। गनीमत रही कि यात्री को केवल मामूली खरोंचें आईं। हादसे के बाद कुछ देर के लिए ट्रेन रोकी गई और फिर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद रवाना कर दी गई।
भोपाल के ग्राम पंचायत अरवलिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक मजबूर महिला के मकान पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई है। पीड़िता, श्रीमती रफत, गंभीर बीमारी के चलते बीते 20 दिनों से अपने मायके में रहकर इलाज करवा रही थीं। जब वे इलाज के बाद अपने घर लौटीं, तो उन्होंने देखा कि उनके मकान का ताला टूटा हुआ है और किसी व्यक्ति ने न केवल ताला बदल दिया है, बल्कि मकान की दीवार पर अपना नाम और मोबाइल नंबर भी लिखवा दिया है।
यह व्यक्ति मोहम्मद शेहजाद खान बताया जा रहा है, जिससे रफत ने उक्त मकान की विधिवत रजिस्ट्री करवा कर खरीदारी की थी। अब वही व्यक्ति खुद को मालिक बताते हुए महिला को धमका रहा है और मकान खाली करने का दबाव बना रहा है। यह मामला न केवल भूमाफिया की दबंगई को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
श्रीमती रफत का कहना है कि जब उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए स्थानीय थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय जोन 4 का रुख किया, तो उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, कार्रवाई नहीं। उन्हें इधर-उधर भटकाया गया और उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
इस तरह की घटनाएं राजधानी भोपाल में लगातार बढ़ रही हैं, जिनमें अकेली महिलाओं और बुजुर्गों की संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। यह न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज में असुरक्षा का माहौल भी पैदा करता है।
एकल सत्य समाचार, भोपाल। जिला शिक्षा केंद्र भोपाल के जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) ओपी शर्मा इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल एक कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर चर्चा में हैं। इस संबंध में एकल सत्य समाचार से बातचीत करते हुए डीपीसी शर्मा ने स्पष्ट किया कि ऑडियो में जिन पैसों की बात हो रही है, वे रिश्वत नहीं बल्कि सरकारी राशि है, जो एडवांस के रूप में दी गई थी।
ओपी शर्मा ने कहा, “मैंने केवल सरकारी कार्य के लिए दी गई एडवांस राशि की वापसी को लेकर कॉल की थी। इसे कुछ लोगों द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, ताकि मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।”
उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारियों को जिम्मेदारियों के अनुसार राशि दी जाती है और नियमानुसार उसका हिसाब भी मांगा जाता है। “यह पूरी प्रक्रिया शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होती है,” शर्मा ने कहा।
डीपीसी शर्मा ने इस बात से साफ इनकार किया कि उन्होंने किसी कर्मचारी से पद या कार्य के बदले पैसे की मांग की है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाएं दुर्भावनापूर्ण हैं और इस मामले में वे वांछित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।
नगर निगम भोपाल का वाहन चालक संघ एक बार फिर विवादों में घिर गया है। जानकारी के अनुसार, संघ ने बिना किसी वैध आवंटन या अनुमति पत्र के नगर निगम की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। यह कब्जा न केवल नियमों की अवहेलना है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।
इतना ही नहीं, वाहन चालक संघ ने करोद क्षेत्र स्थित नवाब कॉलोनी में भी एक कार्यालय पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है। स्थानीय लोगों और निगम सूत्रों के अनुसार, उक्त स्थल पर किसी प्रकार की कानूनी स्वीकृति या अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है और जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। जोन 21 के zo मामले की जांच में जुटे हुए हैं लेकिन कहीं ना कहीं वाहन चालक संघ के दबाव में जांच प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं वही एक कर्मचारी ने चर्चा में बताया कि कार्यालय खाली करने के लिए वाहन चालक संघ को नोटिस चश्मा किया जा चुका है आगे की कार्रवाई के लिए आप zo से बात करें वही स्पष्ट बता पाएंगे कि मामले में देरी क्यों की जा रही है हालांकि अवैध कब्जे को लेकर महापौर में भी जिम्मेदार अधिकारियों को जिताया है कि जल्द से जोन के कार्यालय में हुए अवैध कब्जे को हटाया जाए पर जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे की बगल में नजर आ रहे हैं
भोपाल। शहर के नजूल वृत्त अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में व्याप्त गंदगी और गेट के सामने जमा गंदे पानी ने आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए इस कार्यालय में आते हैं, लेकिन कार्यालय तक पहुंचने से पहले उन्हें गंदगी और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
स्थानीय लोगों और कार्यालय आने वाले नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। कार्यालय परिसर में साफ-सफाई का अभाव और जल निकासी की सही व्यवस्था न होना इस बदहाल स्थिति की मुख्य वजह है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी रास्ते से एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी जैसे उच्च अधिकारी रोजाना गुजरते हैं, लेकिन वे आंखें मूंदे बैठे हैं। अगर वे चाहें तो नगर निगम अथवा संबंधित विभाग को निर्देश देकर इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता साफ झलक रही है।
नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि जब कार्यालय में बैठने वाले अधिकारी ही अपनी कार्यस्थली की हालत सुधारने में रुचि नहीं ले रहे हैं, तो आम जनता की समस्याओं को वे कैसे समझेंगे। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द कार्यालय परिसर की सफाई करवाई जाए और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या न केवल असुविधा बल्कि संक्रामक बीमारियों का कारण भी बन सकती है। प्रशासन की यह लापरवाही निंदनीय है और उच्च अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
आज हमारा पर्यावरण कराह रहा है—वायु दूषित हो चुकी है, पेड़ों की छांव खत्म होती जा रही है, और हर सांस में बीमारी घुलती जा रही है। लेकिन सोचिए, अगर हम सब यह ठान लें कि अपने हर खास मौके पर—जन्मदिन, सालगिरह, माता-पिता की पुण्यतिथि, या किसी गरीब की अंतिम विदाई पर—सिर्फ पाँच पेड़ लगाएं, तो आने वाला कल कितना सुंदर हो सकता है। पेड़ केवल छाया या ऑक्सीजन नहीं देते, वो उम्मीद देते हैं, जीवन देते हैं।
सरकार को चाहिए कि वह ऐसी योजनाएं बनाए जिसमें हर सरकारी कर्मचारी अपने वेतन से पहले यह साबित करे कि उसने कम से कम एक पेड़ लगाया है। और जिनके पास स्थान नहीं, उनके लिए जगह चिन्हित की जाए, ताकि कोई बहाना न बचे।
हमें यह भी समझना होगा कि जितना बड़ा योगदान पेड़ कटाई से होता है, उतना ही बड़ा खतरा आधुनिक सुख-सुविधाओं से भी है। हर परिवार में एक से अधिक वाहन पर सख्त नियंत्रण हो, और जरूरत से ज्यादा साधनों पर भारी कर लगाया जाए।
याद रखिए, जब एक इंसान पांच पेड़ लगाएगा, तो देश में करोड़ों पेड़ लगेंगे। वह दिन दूर नहीं जब हवा फिर से शुद्ध होगी, फल-सब्जियों में फिर से स्वाद होगा, और हर बच्चा बिना मास्क के मुस्कुरा पाएगा। यह सिर्फ एक पहल नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे कीमती तोहफा है। पेड़ लगाइए, आने वाले कल को बचाइए—क्योंकि जीवन हरियाली से ही है।
“अगर वाकई किसी की याद को अमर करना है, तो उसकी याद में एक पेड़ जरूर लगाइए। वो पेड़ आपके प्यार की सबसे जीवित निशानी होगा।”
प्रदेश सत्ता प्रिंटिंग प्रेस का उद्घाटन समाजसेवी अब्दुल मन्नान द्वारा किया गया इस अवसर पर शहर के अधिकांश प्रमुख समाचार पत्रों के संपादकगण उपस्थित रहे। सभी संपादकों ने प्रदेश सत्ता के मालिक वाजिद खान को लाला लाजपत राय कॉलोनी पूलबोगदा स्थित नए प्रेस की स्थापना पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उद्घाटन समारोह में पत्रकारिता जगत के लोगों ने इसे मीडिया क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया और उम्मीद जताई कि यह प्रेस निष्पक्ष व गुणवत्तापूर्ण समाचार प्रकाशन में अहम भूमिका निभाएगा।
भोपाल। बीते छह महीनों से बिना फिटनेस और बीमा के भोपाल की सड़कों पर दौड़ रही एक स्कूली बस ने हाल ही में बड़ा हादसा कर दिया, जिसमें आठ से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हुए और एक युवा महिला डॉक्टर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद भोपाल संभाग के कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से आरटीओ जितेन्द्र शर्मा को निलंबित कर आयुक्त कार्यालय में अटैच कर दिया है।
आरटीओ कार्यालय वाहन फिटनेस और बीमा की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है, लेकिन इस मामले में आरटीओ द्वारा अपने कर्तव्यों में भारी लापरवाही बरती गई। शर्मा स्वयं उड़नदस्ते के प्रभारी भी हैं, फिर भी सड़क पर चल रही अवैध और बिना फिटनेस की बसों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इस घटना के बाद पालक महासंघ मध्य प्रदेश ने एक आवेदन सौंपकर शासन से मांग की है कि शर्मा पर कठोर कार्रवाई की जाए। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जितेन्द्र शर्मा का निलंबन समाप्त न किया जाए, बल्कि उन्हें इस प्रकरण में आरोपी बनाया जाए और जांच के उपरांत बर्खास्त किया जाए, ताकि आने वाले समय में इस तरह की लापरवाहियों पर रोक लगाई जा सके।
महासंघ ने इस संदर्भ में गुना जिले की उस दर्दनाक घटना का भी हवाला दिया है जिसमें एक वाहन की चूक से 13 लोगों की जान गई थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे थे और वाहन मालिक, चालक के साथ-साथ गुना आरटीओ अधिकारी बरोलिया को भी आरोपी बनाया गया था।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब गुना में एक आरटीओ को घटना में लापरवाही के लिए आरोपी बनाया जा सकता है, तो भोपाल के आरटीओ जितेन्द्र शर्मा को बचाने या बहाल कराने के प्रयास क्यों किए जा रहे हैं? प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शर्मा के निलंबन को समाप्त कराने की कवायद जारी है, वहीं परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारी सरकार को हड़ताल की धमकी भी दे चुके हैं।
पालक महासंघ ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि कानून सबके लिए समान हो, और इस मामले में कोई विशेष रियायत नहीं दी जानी चाहिए।
भोपाल। राजधानी भोपाल के एक शादी गार्डन में हाल ही में हुए सिलसिलेवार 10 गैस सिलेंडरों के विस्फोट ने पूरे शहर को दहला दिया था। इस भीषण हादसे के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कुंभकरणी नींद में सोए हुए हैं। चौक-चौराहों और गलियों में आज भी चाय-नाश्ते के ठेलेवाले और छोटे दुकानदार अवैध रूप से घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा दोहराया जा सकता है।
प्रशासन की ओर से न तो अब तक कोई सख्त कार्रवाई की गई है और न ही इन अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। आमजन की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मामला प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रहा है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगला हादसा और भी भयावह हो सकता है।
भोपाल में एक सड़क हादसा हुआ, जब स्कूल बस सिग्नल पर खड़े लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ गई इस घटना में एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत होने की सूचना मिल रही है। इस हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि स्कूल बस का फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज अधूरे थे, इसके बावजूद वह बेधड़क सड़क पर दौड़ रही थी।
स्कूल बस घटना में आरटीओ जितेन्द्र शर्मा पर गिरी गाज, तत्काल निलंबन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) जितेन्द्र शर्मा की घोर लापरवाही का परिणाम माना गया है। कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से शर्मा को निलंबित करते हुए आदेश में लिखा: “श्री जितेन्द्र शर्मा की लापरवाही के कारण यह वाहन बिना फिटनेस सड़क पर चल रहा था, जिससे मासूम की जान गई।”
मध्य प्रदेश में आज भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की जड़ें गहरी
भोपाल परिवहन कार्यालय में लापरवाही, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी कोई नई बात नहीं है। पूर्व में भी अनपा खान, भारती बर्मा, संजय तिवारी समेत कई अधिकारियों पर दलालों को संरक्षण देकर मोटी रकम वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जितेन्द्र शर्मा ने भी रिश्वत के रेट बढ़ा दिए थे, जिससे कार्यालय में दलालों की सक्रियता और बढ़ गई थी। इस प्रकार बढ़ाए गए थे वसूली के रेट MP परमिट ट्रक का पुराना रेट ₹500 नया रेट ₹1500 टैक्सी ऑल इंडिया परमिट के पुराना रेट ₹1000 नया रेट ₹3500 रुपए मोटरसाइकिल TO के पुराना रेट 100 रुपए नया रेट ₹300 ट्रक TO के पुराना रेट ₹500 नया रेट नया रेट ₹2000 रुपए औरत और मध्य प्रदेश में कहीं का भी TO करवाने के सरकार के नियम है लेकिन परिवहन कार्यालय भोपाल में एक अलग ही रूल रिश्वतखोर अधिकारी कर्मचारियों ने बना रखा है फोर व्हीलर अगर छोटी हो तो ₹5000 और बड़ी हो तो 8000 एवं 10000 या फिर जैसा जरूरतमंद वाहन मालिक फस जाए वसूली करते थे
मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से जनता की उम्मीदें धूमिल, सिस्टम पर उठे सवाल
भोपाल परिवहन कार्यालय में आम जनता को राहत मिलने के बजाय, उन्हें रिश्वतखोरी और अफसरशाही के जाल में फंसना पड़ता है। सुबह से ही ऑफिस में आम लोगों से ज्यादा दलालों की भीड़ देखी जाती है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस बार दोषी पर ठोस कार्रवाई होगी या फिर पहले की तरह कुछ समय बाद उन्हें किसी नए पद पर बैठा दिया जाएगा।
RTO अधिकारी जितेन शर्मा पर क्या इस बार होगी सख्त कार्रवाई?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जितेन्द्र शर्मा पर आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या वे भी अन्य दोषी अनपा खान संजय तिवारी भारती वर्मा अधिकारियों की तरह जांच के नाम पर बचा लिए जाएंगे, या इस बार व्यवस्था में बदलाव की कोई शुरुआत होगी? मध्य प्रदेश में हो रहे रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार पर जनता अब जवाब चाहती है – और न्याय भी। अगर इस बार भी भोपाल परिवहन कार्यालय की लापरवाहियों को नजर अंदाज किया गया तो आगे और भी ऐसे ही सड़क दुर्घटना का शिकार जनता होती रहेगी ऐसा नहीं है कि भोपाल आईटीओ समय पर जांच नहीं कर रहे हैं अक्सर आरटीओ स्टाफ के वाहन को चेकिंग करते हुए आप हाईवे पर सुबह-सुबह देख सकते हैं आप समझ में यह नहीं आता की इतनी कड़ी शक्ति के बावजूद इस तरह की लापरवाही किशोर इशारा कर रही है
RTO जितेन शर्मा पर कार्रवाई के बाद अब उनके द्वारा किए गए कारनामों की पोल खुलने लगी है नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया गया कि RTO जितेन शर्मा को मध्य प्रदेश शासन के एक मंत्री का पूरा संरक्षण मिलता है इसलिए परिवहन कमिश्नर और परिवहन डिप्टी कमिश्नर सचिव बेबस है जितेन शर्मा के कई कारनामे सामने आने के बाद भी करवाई तो दूर की बात किसी से चर्चा भी नहीं कर पाते हैं अब देखना यह है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस मामले में सख्त एक्शन लेते हैं या फिर मंत्री जी के संरक्षण में RTO जितेन शर्मा के कारनामों पर पर्दा डालता रहेगा?