राजधानी भोपाल में हो रहे अपराध के पिछले कुछ महीनो का आंकड़ा देखें तो अपराधी लगातार किसी न किसी रूप में अपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं आए दिन किस ना किसी थाना क्षेत्र में गंभीर अपराधों की चर्चा सुनी जा सकती है यहां तक तो पुलिस पर ही जिस थाने में पदस्थ है उसी थाने में अपराध दर्ज हो रहे हैं कहीं पुलिस पिट रही है तो कहीं पुलिस की हत्या तक कर दी जा रही है हत्याओं और लूटपाट चोरी दुष्कर्म महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में अपराधियों के बढ़ते हौसले से ऐसा लगता है कि पुलिस आयुक्त प्रणाली पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बावजूद अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे, है जिससे जनता में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन अपनी धरातल पर कमजोरी स्वीकार करने को तैयार नहीं है और अपराध पर नियंत्रण पाने में विफल नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पुलिस तंत्र में सुधार नहीं किया जाता और अपराधियों से जब तक पुलिस की मित्रता खत्म नहीं होती है तब तक अपराध की रोकथाम तो दूर पुलिस सिस्टम में सुधार होने का भी नहीं सोचा जा सकता है अक्सर थाना क्षेत्र में जुआ सट्टा शराब कबाड़ी भूमिया और अपराधियों पर सख्ती नहीं बरती जाती, तब तक भोपाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर बनी रहेगी। बहुत से अपराध तो ऐसे भी शहर में घट रहे हैं जहां न्याय के लिए पीड़ित थाने के चक्कर काट कर थक जाते हैं बहुत से गंभीर अपराध को भी पुलिस 107 -116 की कार्रवाई कर रही है लेकिन वास्तव में पुलिस 107 -116 से सिर्फ कानून सुरक्षा व्यवस्था की खाना पूर्ति कर रही है
शहर में बढ़ते अपराधों से कानून-व्यवस्था पर उठने लगे हैं सवाल










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