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मनरेगा में मजदूर को मजदूरी नहीं!आदमपुर छावनी में मजदूरी के नाम पर लाखों का भुगतान I

मध्य प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी के भुगतान को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है । आदमपुर छावनी ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत ग्रामीणों से काम नहीं करवा कर मजदूरी का भुगतान अलग-अलग नाम पर बिल वाउचर लगाकर किया जा रहा है सूत्रों गांव में रहने वाले गरीब की मानें तो मजदूरों को मजदूरी न देकर सरपंच सचिव अपने चाहितो को मजदूरी के नाम पर बिल वाउचर लगाकर लाखों-लाखों रुपए का भुगतान विक्रेता आईडी बनाकर कर रहे हैं सौरभ खाणडेलकर गुलमोहर कॉलोनी निवासी मनोज सेन, ग्राम पंचायत आदमपुर छावनी भारत पाल ग्राम पंचायत आदमपुर छावनी मुकेश अहिरवार नेहरू नगर निवासी जैसे लोगों के नाम पर मजदूरी के फर्जी वाउचर लगाकर बड़ी रकम निकाली जा रही है।

फर्जी बिल वाउचर से लाखों का हो गया ठेकेदार को भुगतान

कागजों में मजदूरों को भुगतान दिखाया जा रहा है, लेकिन असल में यह पैसा उनके हाथ तक नहीं पहुंच रहा। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल सरपंच और सचिव की शह पर चल रहा है, जिससे वे खुद मोटी कमाई कर रहे हैं। केंद्र सरकार की यह सबसे महत्वपूर्ण योजना है मनरेगा के तहत हर कमजोर वर्ग के लोगों को मजदूरी मिल सके ताकि वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सके लेकिन पंचायत में देखा जा रहा है की मजदूरी के नाम पर मोटे-मोटे बिल वाउचर लगाकर अलग-अलग नाम पर भुगतान किया जा रहा है इस कारण से आज भी ग्रामीण मनरेगा न मिलने के कारण भुखमरी के शिकार हो रहे हैं जब के मनरेगा के तहत मजदूरी का नियम है कि 1 वर्ष में परिवार के व्यक्ति को 100 दिन या फिर 150 दिन गारंटी रोजगार दिया जाए 100 दिन की मजदूरी 25000 और 150 दिन की 37000 होती है लेकिन आदमपुर छावनी में लाखों लाखों रुपए का भुगतान चार लोगों के नाम पर किया गया है जो की मनरेगा की नियमों का साफ़ तौर पर उल्लंघन है और एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है ग्राम पंचायत आदमपुर छावनी के सचिव से जब इस संबंध में एकल सत्य समाचार पत्र की ओर से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि पंचायत में मजदूर नहीं मिलते हैं इसलिए ठेके पर मजदूरी करवानी पड़ रही है ठेके पर मजदूरी करवाना मनरेगा के नियमों का भी उल्लंघन है इसके लिए सिर्फ और सिर्फ सरपंच सचिव नहीं फंदा ब्लॉक में बैठे CEO और जिला CEO पर भी संदेह हो रहा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी पर अब तक उनकी नजर क्यों नहीं पड़ी बात सिर्फ आदमपुर छावनी की नहीं अधिकतर पंचायत में इस तरह का खेल खेला जा रहा है जो सरपंच सचिव और अधिकारियों की मिली भगत से मनरेगा के नियमों का उल्लंघन करके ठेकेदार के जरिए अपनी भी जेब भरी जा रही है जिससे गरीबों को मजदूरी नहीं मिल रही है और सरकार को चूना लगाया जा रहा है

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