आज हमारा पर्यावरण कराह रहा है—वायु दूषित हो चुकी है, पेड़ों की छांव खत्म होती जा रही है, और हर सांस में बीमारी घुलती जा रही है। लेकिन सोचिए, अगर हम सब यह ठान लें कि अपने हर खास मौके पर—जन्मदिन, सालगिरह, माता-पिता की पुण्यतिथि, या किसी गरीब की अंतिम विदाई पर—सिर्फ पाँच पेड़ लगाएं, तो आने वाला कल कितना सुंदर हो सकता है। पेड़ केवल छाया या ऑक्सीजन नहीं देते, वो उम्मीद देते हैं, जीवन देते हैं।
सरकार को चाहिए कि वह ऐसी योजनाएं बनाए जिसमें हर सरकारी कर्मचारी अपने वेतन से पहले यह साबित करे कि उसने कम से कम एक पेड़ लगाया है। और जिनके पास स्थान नहीं, उनके लिए जगह चिन्हित की जाए, ताकि कोई बहाना न बचे।
हमें यह भी समझना होगा कि जितना बड़ा योगदान पेड़ कटाई से होता है, उतना ही बड़ा खतरा आधुनिक सुख-सुविधाओं से भी है। हर परिवार में एक से अधिक वाहन पर सख्त नियंत्रण हो, और जरूरत से ज्यादा साधनों पर भारी कर लगाया जाए।
याद रखिए, जब एक इंसान पांच पेड़ लगाएगा, तो देश में करोड़ों पेड़ लगेंगे। वह दिन दूर नहीं जब हवा फिर से शुद्ध होगी, फल-सब्जियों में फिर से स्वाद होगा, और हर बच्चा बिना मास्क के मुस्कुरा पाएगा। यह सिर्फ एक पहल नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे कीमती तोहफा है। पेड़ लगाइए, आने वाले कल को बचाइए—क्योंकि जीवन हरियाली से ही है।
“अगर वाकई किसी की याद को अमर करना है, तो उसकी याद में एक पेड़ जरूर लगाइए। वो पेड़ आपके प्यार की सबसे जीवित निशानी होगा।”










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