भोपाल। बीते छह महीनों से बिना फिटनेस और बीमा के भोपाल की सड़कों पर दौड़ रही एक स्कूली बस ने हाल ही में बड़ा हादसा कर दिया, जिसमें आठ से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हुए और एक युवा महिला डॉक्टर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद भोपाल संभाग के कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से आरटीओ जितेन्द्र शर्मा को निलंबित कर आयुक्त कार्यालय में अटैच कर दिया है।
आरटीओ कार्यालय वाहन फिटनेस और बीमा की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है, लेकिन इस मामले में आरटीओ द्वारा अपने कर्तव्यों में भारी लापरवाही बरती गई। शर्मा स्वयं उड़नदस्ते के प्रभारी भी हैं, फिर भी सड़क पर चल रही अवैध और बिना फिटनेस की बसों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इस घटना के बाद पालक महासंघ मध्य प्रदेश ने एक आवेदन सौंपकर शासन से मांग की है कि शर्मा पर कठोर कार्रवाई की जाए। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जितेन्द्र शर्मा का निलंबन समाप्त न किया जाए, बल्कि उन्हें इस प्रकरण में आरोपी बनाया जाए और जांच के उपरांत बर्खास्त किया जाए, ताकि आने वाले समय में इस तरह की लापरवाहियों पर रोक लगाई जा सके।
महासंघ ने इस संदर्भ में गुना जिले की उस दर्दनाक घटना का भी हवाला दिया है जिसमें एक वाहन की चूक से 13 लोगों की जान गई थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे थे और वाहन मालिक, चालक के साथ-साथ गुना आरटीओ अधिकारी बरोलिया को भी आरोपी बनाया गया था।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब गुना में एक आरटीओ को घटना में लापरवाही के लिए आरोपी बनाया जा सकता है, तो भोपाल के आरटीओ जितेन्द्र शर्मा को बचाने या बहाल कराने के प्रयास क्यों किए जा रहे हैं? प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शर्मा के निलंबन को समाप्त कराने की कवायद जारी है, वहीं परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारी सरकार को हड़ताल की धमकी भी दे चुके हैं।
पालक महासंघ ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि कानून सबके लिए समान हो, और इस मामले में कोई विशेष रियायत नहीं दी जानी चाहिए।










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