भोपाल-राजधानी भोपाल के रूपनगर क्षेत्र, वार्ड क्रमांक 70 के निवासी वर्षों से भैंसों की डेयरी के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। शहर के बीचों-बीच संचालित यह डेयरी इलाके में गंदगी, दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का कारण बन रही है। स्थानीय रहवासी लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है।
यह स्थिति तब है जब न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि शहर के आवासीय क्षेत्रों, विशेषकर मध्य क्षेत्र में, किसी भी प्रकार की पशु डेयरी का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। इसके बावजूद वार्ड 70 में वर्षों से चल रही यह डेयरी आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रही है। रहवासियों ने कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं — नालियों में गोबर और पेशाब बहने लगता है, जिससे मच्छरों और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अब लोग सवाल कर रहे हैं — जब कोर्ट का आदेश है, तो फिर यह लापरवाही क्यों? क्या जिम्मेदार अफसर किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं?
स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और रहवासी चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस अवैध डेयरी को वहां से हटाया जाए ताकि वे भी स्वच्छ और सुरक्षित जीवन जी सकें।
भोपाल के रूप नगर में नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अवैध दूध डेयरियों का संचालन बेरोकटोक जारी है। बिना किसी अनुमति के, नियमों को ताक पर रखकर इन इलाकों में डेयरियाँ चलाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को लगातार गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर के नियम साफ़ कहते हैं कि नगर निगम सीमा क्षेत्र के भीतर और खासकर रिहायशी इलाकों में एक भी डेयरी संचालित नहीं होनी चाहिए। अगर किसी कॉलोनी में डेयरी पाई जाती है, तो उस पर डेयरी संचालक को एक वर्ष की सजा और प्रत्येक पशु पर ₹1,000 का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। लेकिन हकीकत में निगम की कार्रवाई महज़ औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायत मिलने या कभी-कभार अधिकारी के आदेश पर मामूली जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है — नतीजा, अवैध डेरी वहीं की वहीं जमी रहती है।










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